Hartalika Teej Puja Samagri 2026:हरतालिका तीज का व्रत हिंदू धर्म में भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित महत्वपूर्ण पर्वों में से एक माना जाता है। 2026 में हरतालिका तीज सोमवार, 14 सितंबर को मनाई जाएगी। यह व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा की जाती है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!हरतालिका तीज की पूजा में कई तरह की सामग्री इस्तेमाल होती है। अगर पूजा के समय बार-बार सामान ढूंढना पड़े या कोई जरूरी वस्तु छूट जाए, तो पूजा में व्यवधान आ सकता है। इसलिए बेहतर है कि Hartalika Teej Puja Samagri List पहले से तैयार कर ली जाए।
इस लेख में आपको हरतालिका तीज 2026 की पूजा सामग्री की पूरी checklist मिलेगी। साथ ही जानेंगे कि शिव-पार्वती पूजा के लिए क्या चाहिए, सुहाग सामग्री में क्या रखें, पंचामृत कैसे तैयार करें, कौन-सी वस्तुएं optional हैं, पूजा से पहले क्या तैयारी करें और पूजा करते समय किन बातों का ध्यान रखा जा सकता है।
Hartalika Teej 2026 कब है?
2026 में हरतालिका तीज:
तारीख: 14 सितंबर 2026
दिन: सोमवार
दृक पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 13 सितंबर को सुबह शुरू होकर 14 सितंबर की सुबह तक रहेगी। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और पूजा मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है। उदाहरण के लिए Delhi में प्रातःकालीन पूजा मुहूर्त लगभग 6:05 AM से 7:06 AM और Lucknow में लगभग 5:51 AM से 7:06 AM बताया गया है।
इसलिए किसी एक समय को पूरे भारत के लिए अंतिम न मानें। अपने शहर का स्थानीय पंचांग जरूर देखें।
Hartalika Teej Puja Samagri List 2026
सबसे पहले एक आसान checklist देख लें।
मुख्य पूजा सामग्री
हरतालिका तीज की पूजा के लिए सामान्य रूप से यह सामग्री पहले से रखी जा सकती है:
- भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र
- गणेश जी की प्रतिमा या चित्र
- मिट्टी या बालू, यदि पार्थिव स्वरूप बनाना हो
- पूजा की चौकी
- साफ लाल या पीला कपड़ा
- कलश
- जल
- गंगाजल
- रोली
- कुमकुम
- हल्दी
- अक्षत यानी साबुत चावल
- चंदन
- मौली या कलावा
- जनेऊ
- धूप
- अगरबत्ती
- कपूर
- दीपक
- रुई की बाती
- घी या तेल
- फूल
- फूलों की माला
- बेलपत्र
- दूर्वा
- पान
- सुपारी
- लौंग
- इलायची
- नारियल
- मौसमी फल
- मिठाई
- दक्षिणा
- पूजा की थाली
- घंटी
- आरती की थाली
विभिन्न क्षेत्रों और परिवारों में पूजा सामग्री में कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए अपने परिवार की परंपरा के अनुसार सामग्री जोड़ना या घटाना सामान्य बात है।
समकालीन धार्मिक guides में भी पूजा के लिए शिव-पार्वती पूजन सामग्री, पंचामृत, भोग और सुहाग सामग्री को प्रमुख माना गया है।
शिव-पार्वती पूजा के लिए जरूरी सामग्री
हरतालिका तीज का केंद्र भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा है।
इसके लिए निम्न सामग्री तैयार रखें:
1. भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा
कई घरों में भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति रखी जाती है।
परंपरागत रूप से कुछ स्थानों पर मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती का प्रतीकात्मक स्वरूप भी बनाया जाता है। दृक पंचांग भी हरतालिका तीज पर बालू से शिव-पार्वती का स्वरूप बनाकर पूजन की परंपरा का उल्लेख करता है।
यदि आपके घर में यह परंपरा नहीं है, तो चित्र या पहले से मौजूद प्रतिमा से पूजा की जा सकती है।
2. पूजा की चौकी
एक साफ चौकी लें और उस पर लाल, पीला या स्वच्छ कपड़ा बिछाएं।
इसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी का स्वरूप स्थापित करें।
3. जल और गंगाजल
पूजा स्थल की शुद्धि और पूजा के विभिन्न चरणों में जल की आवश्यकता होती है।
यदि उपलब्ध हो तो थोड़ा गंगाजल भी रख सकते हैं।
4. चंदन, रोली, हल्दी और कुमकुम
भगवान शिव और माता पार्वती को तिलक और पूजन के लिए चंदन, रोली, कुमकुम और हल्दी का उपयोग किया जाता है।
ध्यान रखें कि भगवान शिव की पूजा में परिवार और परंपरा के अनुसार सामग्री का उपयोग अलग-अलग हो सकता है।
5. अक्षत
पूजा के लिए साबुत और साफ चावल रखें।
इन्हें अक्षत कहा जाता है और कई हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग किया जाता है।
6. बेलपत्र
भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष स्थान माना जाता है।
जहां उपलब्ध हो वहां साफ बेलपत्र पहले से रख लें।
बेलपत्र तोड़ने और चढ़ाने से जुड़े स्थानीय धार्मिक नियम अलग-अलग परंपराओं में मिलते हैं, इसलिए अपने परिवार या पुरोहित की परंपरा का पालन करें।
7. फूल और माला
भगवान शिव और माता पार्वती के पूजन के लिए ताजे फूल रखें।
फूलों की एक छोटी माला भी रख सकते हैं।
माता पार्वती के लिए सुहाग सामग्री
हरतालिका तीज की पूजा में माता पार्वती को सुहाग और श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करने की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है।
सामान्य सुहाग सामग्री
आप अपनी परंपरा के अनुसार इनमें से सामग्री रख सकते हैं:
- सिंदूर
- बिंदी
- चूड़ियां
- मेहंदी
- काजल
- कंघी
- चुनरी
- लाल कपड़ा
- बिछिया
- पायल
- महावर
- शीशा
- रिबन
- श्रृंगार का छोटा सामान
जरूरी नहीं कि हर जगह सभी चीजें अनिवार्य मानी जाएं।
अगर आपके परिवार में केवल कुछ विशेष सुहाग सामग्री चढ़ाने की परंपरा है, तो वही रखें।
हरतालिका तीज में गणेश जी की पूजा के लिए सामग्री
अनेक हिंदू पूजा-पद्धतियों में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश पूजन से की जाती है।
हरतालिका तीज की पूजा में भी गणेश जी का स्मरण और पूजन किया जाता है।
इसके लिए रखें:
- गणेश जी की प्रतिमा या चित्र
- दूर्वा
- फूल
- अक्षत
- रोली
- मौली
- दीपक
- धूप
- मोदक या अन्य मिठाई
ध्यान रखें कि भोग स्थानीय परंपरा और उपलब्धता के अनुसार बदला जा सकता है।
कलश स्थापना के लिए सामग्री
यदि आपके घर में हरतालिका तीज पूजा में कलश रखने की परंपरा है तो यह सामान तैयार रखें:
- तांबे, पीतल या मिट्टी का कलश
- स्वच्छ जल
- गंगाजल
- सुपारी
- सिक्का
- अक्षत
- आम या अन्य मान्य पत्तियां
- नारियल
- लाल कपड़ा
- मौली
कलश स्थापना की विधि अलग-अलग परंपराओं में भिन्न हो सकती है।
पंचामृत के लिए क्या-क्या चाहिए?
कई परिवारों में भगवान शिव के पूजन में पंचामृत तैयार किया जाता है।
पंचामृत में सामान्य रूप से पांच चीजें होती हैं:
- दूध
- दही
- घी
- शहद
- शक्कर
सभी वस्तुएं साफ पात्र में रखें।
यदि आपके परिवार में पंचामृत अर्पित करने की परंपरा नहीं है तो इसे अनिवार्य न समझें।
पूजा की परंपराएं क्षेत्र और परिवार के अनुसार बदल सकती हैं।
भोग के लिए क्या रखें?
हरतालिका तीज के भोग में स्थानीय और पारिवारिक परंपराओं का प्रभाव अधिक होता है।
सामान्य रूप से आप रख सकते हैं:
- मौसमी फल
- नारियल
- मिठाई
- सूखे मेवे
- घर में बना सात्विक प्रसाद
कुछ क्षेत्रों में विशेष पकवान बनाने की परंपरा भी होती है।
आप वही भोग रखें जो आपके परिवार में प्रचलित हो।
फल की सूची
अगर आप पूजा से पहले shopping list बना रहे हैं, तो इनमें से उपलब्ध फल रख सकते हैं:
- केला
- सेब
- अनार
- अमरूद
- नारियल
- अंगूर
- संतरा
- मौसम के अन्य फल
पांच अलग प्रकार के फल रखना कई जगह प्रचलित है, लेकिन इसे हर क्षेत्र के लिए अनिवार्य नियम न मानें।
पूजा के लिए पत्तियां और प्राकृतिक सामग्री
कुछ पारंपरिक पूजाओं में विभिन्न पत्तियों का उपयोग किया जाता है।
सामान्य रूप से हरतालिका पूजा की shopping list में लोग रखते हैं:
- बेलपत्र
- दूर्वा
- पान
- फूल
- पुष्पमाला
कई क्षेत्रों में अलग-अलग प्रकार की पत्तियों से पूजा करने की स्थानीय परंपरा भी मिलती है।
यदि ऐसी कोई विशेष परंपरा आपके परिवार में है, तो पहले घर के बुजुर्गों या पुरोहित से पूछ लें।
दीपक और आरती की सामग्री
आरती के समय अंतिम समय में सामान ढूंढने की जरूरत न पड़े, इसके लिए पहले से रखें:
- दीपक
- रुई
- घी
- कपूर
- माचिस या lighter
- आरती की थाली
- फूल
- घंटी
पूजा स्थल पर दीपक रखते समय अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखें।
छोटे बच्चों के आसपास जलता दीपक या कपूर अकेला न छोड़ें।
हरतालिका तीज पूजा में कपड़े और सजावट
पूजा स्थल को बहुत महंगा या भव्य बनाना जरूरी नहीं है।
साफ-सफाई और श्रद्धा ज्यादा महत्वपूर्ण है।
सजावट में आप उपयोग कर सकते हैं:
- लाल या पीला कपड़ा
- फूल
- फूलों की माला
- रंगोली
- मिट्टी के दीपक
- आम या अशोक के पत्ते
- प्राकृतिक सजावट
जहां संभव हो, single-use plastic या thermocol की सजावट से बच सकते हैं।
दान के लिए क्या रखा जा सकता है?
हरतालिका तीज के अवसर पर कई परिवार पूजा के बाद अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार दान भी करते हैं।
इसमें शामिल हो सकता है:
- भोजन
- फल
- वस्त्र
- दक्षिणा
- सुहाग सामग्री
- जरूरतमंदों के लिए उपयोगी वस्तुएं
दान को दिखावे या दबाव से जोड़ने की आवश्यकता नहीं है।
अपनी क्षमता के अनुसार किया गया दान ही पर्याप्त है।
पूजा से एक दिन पहले क्या तैयारी करें?
हरतालिका तीज 14 सितंबर 2026 को है, इसलिए बेहतर होगा कि जरूरी पूजा सामग्री पहले ही जुटा लें।
एक दिन पहले यह काम करें
पूजा स्थान साफ करें
जहां पूजा करनी है वहां अच्छी तरह सफाई कर लें।
प्रतिमा या चित्र तैयार रखें
भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी का चित्र या प्रतिमा पहले से रखें।
फूल और बेलपत्र की व्यवस्था करें
ताजी सामग्री ऐसी जगह रखें जहां वह खराब न हो।
पूजा की थाली तैयार करें
रोली, अक्षत, कुमकुम, मौली, धूप और कपूर एक जगह रख दें।
सुहाग सामग्री अलग रखें
माता पार्वती को अर्पित की जाने वाली श्रृंगार सामग्री एक basket या थाली में रख सकते हैं।
फल और प्रसाद की तैयारी
फल धोकर रखें और भोग के लिए आवश्यक सामग्री तैयार कर लें।
इस तैयारी से पूजा के समय जल्दबाजी कम होगी।
Hartalika Teej Puja Vidhi: आसान पूजा विधि
पूजा विधि स्थानीय परंपराओं के अनुसार अलग हो सकती है। नीचे सामान्य और सरल क्रम दिया जा रहा है।
1. सुबह स्नान करें
सुबह उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
पूजा स्थल को स्वच्छ रखें।
2. पूजा का संकल्प लें
अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार व्रत और पूजा का संकल्प लें।
3. गणेश जी का पूजन करें
भगवान गणेश का स्मरण कर पूजा आरंभ करें।
4. शिव-पार्वती की स्थापना करें
भगवान शिव और माता पार्वती का स्वरूप चौकी पर स्थापित करें।
दृक पंचांग के अनुसार हरतालिका पूजा में मिट्टी या बालू से बने शिव-पार्वती स्वरूप की पूजा की परंपरा भी है।
5. पूजन सामग्री अर्पित करें
जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, बेलपत्र और उपलब्ध पूजा सामग्री अर्पित करें।
6. माता पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित करें
श्रृंगार की वस्तुएं श्रद्धापूर्वक रखें।
7. भोग अर्पित करें
फल, मिठाई या परिवार की परंपरा के अनुसार प्रसाद चढ़ाएं।
8. हरतालिका तीज कथा सुनें या पढ़ें
पूजा में हरतालिका तीज की कथा पढ़ने या सुनने की परंपरा है।
दृक पंचांग भी पूजा के दौरान हरतालिका की कथा के पाठ का उल्लेख करता है।
9. आरती करें
भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।
हरतालिका तीज की कथा का संक्षिप्त भाव
हरतालिका शब्द से जुड़ी पारंपरिक कथा माता पार्वती की भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने की तपस्या से संबंधित है।
दृक पंचांग के अनुसार प्रचलित कथा में माता पार्वती की सखी उन्हें वन में ले गई थी, ताकि उनका विवाह उनकी इच्छा के विरुद्ध भगवान विष्णु से न हो। कथा के अनुसार माता पार्वती ने वन में तपस्या करते हुए भगवान शिव की उपासना की।
इसी कथा से हरतालिका नाम की व्याख्या की जाती है।
इस पर्व को शिव और पार्वती के समर्पण, संकल्प और दांपत्य आदर्श से जोड़ा जाता है।
क्या हरतालिका तीज निर्जला व्रत होता है?
कई परंपराओं में हरतालिका तीज का व्रत कठोर या निर्जला रूप से रखा जाता है और धार्मिक guides में भी निर्जला व्रत की परंपरा का उल्लेख मिलता है।
लेकिन यहां स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है।
गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग, मधुमेह, लो ब्लड प्रेशर, किडनी या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के कठोर निर्जला उपवास नहीं करना चाहिए।
धार्मिक आस्था स्वास्थ्य को खतरे में डालने की मांग नहीं करती।
अपने स्वास्थ्य और पारिवारिक परंपरा के अनुसार निर्णय लें।
पूजा का सही समय क्या है?
हरतालिका तीज की पूजा के लिए प्रातःकाल को शुभ माना जाता है। यदि सुबह पूजा संभव न हो तो कुछ परंपराओं में प्रदोष काल में शिव-पार्वती पूजा करने का उल्लेख मिलता है।
लेकिन पूजा का समय location-specific होता है।
उदाहरण:
Delhi: लगभग 6:05 AM से 7:06 AM
Lucknow: लगभग 5:51 AM से 7:06 AM
Kanpur: लगभग 5:54 AM से 7:06 AM
Indore: लगभग 6:13 AM से 7:06 AM
इसलिए अपने शहर का पंचांग देखकर ही final muhurat तय करें।
पूजा सामग्री खरीदते समय किन गलतियों से बचें?
जरूरत से ज्यादा सामान न खरीदें
पूजा के नाम पर बहुत अधिक सामग्री खरीदना आवश्यक नहीं है।
सादगी से भी पूजा की जा सकती है।
स्थानीय परंपरा को नजरअंदाज न करें
इंटरनेट पर मिली हर सूची आपके परिवार पर लागू हो, जरूरी नहीं।
प्लास्टिक सजावट कम करें
जहां संभव हो फूल, कपड़ा, मिट्टी के दीपक और reusable decoration इस्तेमाल करें।
खराब फल या फूल न लें
पूजा सामग्री ताजी और साफ रखें।
आखिरी समय तक shopping न छोड़ें
कुछ चीजें जैसे बेलपत्र, फूल, सुहाग सामग्री या पूजा की विशेष वस्तुएं अंतिम समय में आसानी से न मिलें।
अगर पूजा की कोई सामग्री छूट जाए तो क्या करें?
बहुत से लोग इस बात को लेकर चिंतित हो जाते हैं कि पूजा सामग्री में कोई वस्तु छूट गई तो पूजा अधूरी हो जाएगी।
ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है।
परंपराएं अलग-अलग होती हैं और सभी स्थानों पर सामग्री की सूची एक जैसी नहीं है।
यदि कोई सामान्य वस्तु उपलब्ध न हो तो श्रद्धा से पूजा जारी रखें और अपने परिवार के बुजुर्ग या पुरोहित से मार्गदर्शन लें।
पूजा को केवल shopping checklist में बदल देना भी उचित नहीं है।
पहली बार हरतालिका तीज पूजा कर रही हैं तो क्या करें?
अगर आप पहली बार हरतालिका तीज की पूजा कर रही हैं तो बहुत जटिल व्यवस्था करने की जरूरत नहीं है।
पहले मूल सामग्री तैयार करें:
- शिव-पार्वती का स्वरूप
- गणेश जी
- जल
- फूल
- बेलपत्र
- अक्षत
- चंदन
- रोली
- दीपक
- धूप
- फल
- मिठाई
- सुहाग सामग्री
- कथा
- आरती
इसके बाद अपने घर की परंपरा के अनुसार दूसरी चीजें जोड़ें।
पूजा की Simple Shopping Checklist
बाजार जाने से पहले यह short checklist screenshot कर सकते हैं:
पूजा सामग्री:
रोली, अक्षत, हल्दी, कुमकुम, चंदन, मौली, धूप, कपूर, रुई, घी।
शिव पूजा:
बेलपत्र, फूल, जल, गंगाजल।
माता पार्वती:
सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी, चुनरी और श्रृंगार सामग्री।
गणेश पूजा:
दूर्वा, फूल और मिठाई।
भोग:
फल, मिठाई, नारियल और घर का सात्विक प्रसाद।
अन्य:
कलश, सुपारी, पान, दक्षिणा, दीपक और पूजा की थाली।
हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी 2026
2026 में हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों 14 सितंबर को पड़ रही हैं। दृक पंचांग के 2026 calendar में भी Ganesh Chaturthi 14 September दर्शाई गई है।
अगर आपके घर में दोनों पर्वों की पूजा होती है तो बेहतर होगा कि:
- दोनों की सामग्री पहले से अलग-अलग थालियों में रखें
- पूजा का समय स्थानीय पंचांग के अनुसार देखें
- गणेश पूजा और शिव-पार्वती पूजा की सामग्री को व्यवस्थित रखें
- घर की परंपरा के अनुसार पूजा का क्रम तय करें
इससे एक ही दिन दो पर्व होने के कारण भ्रम कम होगा।
हरतालिका तीज का धार्मिक महत्व
हरतालिका तीज का पर्व मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ा है।
धार्मिक परंपरा में इसे दांपत्य सुख, अखंड सौभाग्य और परिवार की मंगलकामना से जोड़ा जाता है।
लेकिन इसका व्यापक संदेश केवल वैवाहिक जीवन तक सीमित नहीं है।
माता पार्वती की कथा दृढ़ संकल्प, तपस्या और अपनी इच्छा के प्रति समर्पण का भी संदेश देती है।
पूजा में श्रद्धा ज्यादा जरूरी या सामग्री?
पूजा की सामग्री धार्मिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन पूजा का मूल उद्देश्य श्रद्धा और भक्ति है।
महंगे फूल, बड़ी सजावट या बहुत सारी पूजा सामग्री होने से ही पूजा श्रेष्ठ हो जाए, ऐसा मानना जरूरी नहीं है।
आप उपलब्ध संसाधनों के अनुसार सरल पूजा भी कर सकते हैं।
परिवार की परंपरा और अपने विश्वास का सम्मान करें।
हरतालिका तीज पर पर्यावरण का भी रखें ध्यान
त्योहारों में पर्यावरण का ध्यान रखना भी अच्छी परंपरा बन सकती है।
आप:
- प्लास्टिक की सजावट कम करें
- प्राकृतिक फूलों का उपयोग करें
- मिट्टी के दीपक लें
- reusable कपड़े की सजावट करें
- पूजा सामग्री को नदी या नाले में न फेंकें
- जैविक सामग्री का उचित तरीके से निस्तारण करें
इससे धार्मिक आस्था और प्रकृति दोनों का सम्मान होता है।
हरतालिका तीज से जुड़ी अन्य धार्मिक जानकारी
अगर आपको हिंदू त्योहारों, मंदिरों और धार्मिक परंपराओं के बारे में पढ़ना पसंद है, तो हमारी वेबसाइट का धार्मिक सेक्शन देखें:
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Hartalika Teej Puja Samagri FAQ
हरतालिका तीज 2026 कब है?
हरतालिका तीज 2026 सोमवार, 14 सितंबर को मनाई जाएगी।
हरतालिका तीज में किसकी पूजा की जाती है?
इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। गणेश जी का भी पूजन किया जाता है।
पूजा के लिए सबसे जरूरी सामग्री क्या है?
भगवान शिव-पार्वती का स्वरूप, गणेश जी, जल, फूल, बेलपत्र, अक्षत, चंदन, रोली, दीपक, धूप, फल, मिठाई और माता पार्वती के लिए सुहाग सामग्री प्रमुख रूप से रखी जाती है।
क्या शिव-पार्वती की मिट्टी की मूर्ति बनाना जरूरी है?
कुछ परंपराओं में मिट्टी या बालू से स्वरूप बनाकर पूजा की जाती है। दृक पंचांग भी इस परंपरा का उल्लेख करता है।
हालांकि स्थानीय और पारिवारिक परंपराएं अलग हो सकती हैं।
क्या हरतालिका तीज का व्रत निर्जला होता है?
कई परंपराओं में निर्जला व्रत रखा जाता है।
स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर चिकित्सकीय सलाह और अपनी क्षमता को प्राथमिकता दें।
हरतालिका तीज पूजा सुबह करें या शाम?
प्रातःकाल की पूजा को अच्छा माना गया है। सुबह संभव न होने पर कुछ परंपराओं में प्रदोष काल में पूजा का उल्लेख मिलता है।
क्या पूजा में सुहाग सामग्री जरूरी है?
माता पार्वती को सुहाग और श्रृंगार सामग्री अर्पित करना कई क्षेत्रों में प्रचलित परंपरा है। सामग्री की मात्रा और प्रकार परिवार के अनुसार बदल सकते हैं।
पूजा सामग्री में कुछ छूट जाए तो क्या करें?
घबराएं नहीं। सभी क्षेत्रों में सामग्री एक जैसी नहीं होती। श्रद्धा से पूजा करें और जरूरत हो तो परिवार के बुजुर्ग या पुरोहित से मार्गदर्शन लें।
Hartalika Teej Puja Samagri Final Checklist
पूजा शुरू करने से पहले आखिरी बार यह check कर लें:
- शिव-पार्वती का स्वरूप
- गणेश जी
- चौकी और कपड़ा
- जल और गंगाजल
- कलश
- रोली
- अक्षत
- हल्दी
- कुमकुम
- चंदन
- मौली
- बेलपत्र
- दूर्वा
- फूल
- माला
- दीपक
- घी
- रुई
- कपूर
- धूप
- अगरबत्ती
- पान
- सुपारी
- नारियल
- फल
- मिठाई
- पंचामृत सामग्री
- सुहाग सामग्री
- कथा
- आरती की थाली
- दक्षिणा
इस checklist का screenshot लेकर आप shopping के समय इस्तेमाल कर सकते हैं।
Disclaimer
इस लेख में दी गई पूजा सामग्री और पूजा-विधि सामान्य धार्मिक परंपराओं और उपलब्ध पंचांग/धार्मिक स्रोतों पर आधारित है। भारत के अलग-अलग क्षेत्रों, समुदायों और परिवारों में हरतालिका तीज की पूजा-विधि और सामग्री में अंतर हो सकता है।
अपने परिवार की परंपरा या स्थानीय पुरोहित के निर्देश को प्राथमिकता दें।
व्रत से संबंधित स्वास्थ्य निर्णय अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर लें।
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अंत में जाते-जाते
हरतालिका तीज की पूजा की तैयारी पहले से कर लेने पर पूजा के समय जल्दबाजी और परेशानी काफी कम हो जाती है। भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा के लिए जरूरी मूल सामग्री पहले इकट्ठी कर लें और उसके बाद अपने परिवार की परंपरा के अनुसार सुहाग, भोग और अन्य वस्तुएं जोड़ें।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूजा को केवल सामग्री की लंबी सूची न बनाएं। धार्मिक परंपरा में श्रद्धा, संकल्प और भक्ति का स्थान सबसे ऊपर है।
हरतालिका तीज 2026 पर भगवान शिव और माता पार्वती आपके परिवार में सुख, शांति और मंगल बनाए रखें। हर हर महादेव।