अनंत चतुर्दशी 2026 कब है? शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, 14 गांठों का रहस्य और अनंत सूत्र का महत्व

अनंत चतुर्दशी 2026

अनंत चतुर्दशी 2026 कब है? अनंत चतुर्दशी को अक्सर दो अलग-अलग तस्वीरों में देखा जाता है। कहीं भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप के सामने 14 गांठों वाला अनंत सूत्र रखा दिखाई देता है, तो कहीं हजारों श्रद्धालु “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारों के साथ गणेश प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाते दिखाई देते हैं।

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक ही तिथि पर भगवान विष्णु की “अनंत” उपासना और गणपति की विदाई—इन दोनों परंपराओं का संदेश क्या है?

यही इस लेख का खास पहलू है।

अनंत चतुर्दशी को केवल “धागा बांधने का दिन” या “गणेश विसर्जन की तारीख” समझना इस पर्व के व्यापक धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को अधूरा कर देता है।

2026 में अनंत चतुर्दशी शुक्रवार, 25 सितंबर को मनाई जाएगी।

इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा, अनंत सूत्र धारण करने और व्रत रखने की परंपरा है। इसी तिथि पर गणेशोत्सव का प्रमुख गणपति विसर्जन भी किया जाता है।

इस विस्तृत guide में जानेंगे—

  • अनंत चतुर्दशी 2026 कब है?
  • चतुर्दशी तिथि कब शुरू और समाप्त होगी?
  • पूजा का शुभ समय क्या रहेगा?
  • भगवान विष्णु के “अनंत” स्वरूप का अर्थ क्या है?
  • अनंत सूत्र में 14 गांठें ही क्यों लगाई जाती हैं?
  • पुरुष और महिलाएं अनंत सूत्र किस हाथ में बांधें?
  • अनंत चतुर्दशी की सरल पूजा विधि क्या है?
  • व्रत रखने वाले क्या खाएं और किन बातों का ध्यान रखें?
  • ऋषि कौंडिन्य और सुशीला की कथा क्या संदेश देती है?
  • गणपति विसर्जन इसी दिन क्यों किया जाता है?
  • अनंत सूत्र कितने दिन पहनना चाहिए?
  • क्या इस व्रत को 14 वर्षों तक करना जरूरी है?
  • और कौन-सी बातें धार्मिक मान्यता हैं जिन्हें निश्चित वैज्ञानिक या आर्थिक परिणाम समझना सही नहीं होगा?

अनंत चतुर्दशी 2026 कब है?

साल 2026 में अनंत चतुर्दशी:

शुक्रवार, 25 सितंबर 2026

को मनाई जाएगी।

पंचांग गणना के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात शुरू होकर 25 सितंबर की रात तक रहेगी।

चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 24 सितंबर 2026, रात लगभग 11:18 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 25 सितंबर 2026, रात लगभग 11:06 बजे

इसलिए उदया तिथि और धार्मिक परंपरा के अनुसार अनंत चतुर्दशी का मुख्य पर्व 25 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा।

पंचांग और अपने शहर के अनुसार समय देखने के लिए Drik Panchang पर Anant Chaturdashi 2026 की जानकारी देखें।

जरूरी बात: पूजा का समय सूर्योदय और स्थान के अनुसार कुछ मिनट बदल सकता है। इसलिए किसी विशेष संकल्प, मंदिर पूजा या पारिवारिक अनुष्ठान के लिए अपने स्थानीय पंचांग या पुरोहित के समय को प्राथमिकता दें।


अनंत चतुर्दशी का वास्तविक अर्थ क्या है?

“अनंत” शब्द का सामान्य अर्थ है—

जिसका अंत न हो।

हिंदू धार्मिक परंपरा में भगवान विष्णु को सृष्टि के पालनकर्ता के रूप में माना जाता है। उनका “अनंत” स्वरूप समय, सृष्टि और अस्तित्व की अनंतता से जोड़ा जाता है।

भगवान विष्णु को क्षीरसागर में शेषनाग पर विराजमान दिखाया जाता है। शेषनाग को “अनंत” भी कहा जाता है।

इसलिए अनंत चतुर्दशी का भाव केवल कोई मनोकामना मांगना नहीं है।

यह दिन मनुष्य को याद दिलाता है कि—

समय चलता रहता है।

परिस्थितियां बदलती रहती हैं।

सुख और कठिनाई दोनों स्थायी नहीं हैं।

लेकिन जीवन में सही संकल्प, धैर्य और धर्म का पालन मनुष्य को परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति देता है।

यही कारण है कि इस दिन बांधा जाने वाला अनंत सूत्र भी केवल सजावटी धागा नहीं बल्कि संकल्प का प्रतीक माना जाता है।


अनंत सूत्र में 14 गांठें ही क्यों होती हैं?

अनंत चतुर्दशी की सबसे खास पहचान है—

14 गांठों वाला अनंत सूत्र।

यह प्रश्न बहुत से लोगों के मन में आता है कि आखिर 12, 16 या 21 की जगह 14 गांठें ही क्यों लगाई जाती हैं?

एक प्रचलित धार्मिक व्याख्या के अनुसार अनंत सूत्र की 14 गांठों को हिंदू ब्रह्मांडीय अवधारणा में बताए गए 14 लोकों से जोड़ा जाता है।

इनमें सात ऊर्ध्व लोक और सात अधोलोक की अवधारणा बताई जाती है।

इस तरह 14 गांठों वाला सूत्र सृष्टि की व्यापकता और भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का प्रतीक माना जाता है।

हालांकि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों और धार्मिक परंपराओं में इन 14 गांठों की व्याख्या थोड़ी अलग भी मिल सकती है।

इसलिए इसे किसी एक वैज्ञानिक formula की तरह नहीं, बल्कि धार्मिक symbolism के रूप में समझना ज्यादा उचित है।


14 गांठों को 14 जीवन-संकल्प से भी जोड़ सकते हैं

यहीं से इस पर्व को आज के जीवन से जोड़ने का एक सुंदर तरीका निकलता है।

अनंत सूत्र बांधते समय 14 गांठों को केवल इच्छाओं से जोड़ने की जगह आप 14 अच्छे संकल्पों की याद भी बना सकते हैं।

जैसे—

  1. सत्य बोलने का संकल्प
  2. माता-पिता का सम्मान
  3. परिवार के प्रति जिम्मेदारी
  4. क्रोध पर नियंत्रण
  5. किसी का अनावश्यक अपमान न करना
  6. जरूरतमंद की सहायता
  7. अपने शरीर और स्वास्थ्य का ध्यान
  8. मेहनत से पीछे न हटना
  9. लालच से बचना
  10. आर्थिक अनुशासन रखना
  11. प्रकृति का सम्मान
  12. अपने धर्म और संस्कृति को समझना
  13. मुश्किल समय में धैर्य रखना
  14. ईश्वर के प्रति कृतज्ञ रहना

यह कोई शास्त्रीय अनिवार्य नियम नहीं है, बल्कि अनंत सूत्र के symbolism को आज के जीवन में meaningful बनाने का एक तरीका है।


अनंत सूत्र कैसा होना चाहिए?

परंपरागत रूप से अनंत सूत्र सूती धागे से बनाया जाता है।

इसे हल्दी, केसर या कुमकुम आदि से रंगने की परंपरा भी कई क्षेत्रों में मिलती है।

इसमें 14 गांठें लगाई जाती हैं।

बाजार में तैयार अनंत सूत्र आसानी से मिल जाता है, लेकिन यदि उपलब्ध न हो तो इसे घर पर भी बनाया जा सकता है।

घर पर अनंत सूत्र बनाने का आसान तरीका

एक साफ सूती धागा लें।

उसे अपने परिवार की परंपरा के अनुसार हल्दी या कुमकुम से रंग सकते हैं।

इसके बाद धागे में 14 अलग-अलग गांठें लगाएं।

पूजा के समय इसे भगवान विष्णु के सामने रखें।

हल्दी, कुमकुम, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।

पूजा पूर्ण होने के बाद अनंत सूत्र धारण करें।


पुरुष और महिलाएं अनंत सूत्र किस हाथ में बांधें?

यह अनंत चतुर्दशी से जुड़ा एक बहुत सामान्य सवाल है।

कई प्रचलित परंपराओं के अनुसार—

पुरुष अनंत सूत्र दाएं हाथ में बांधते हैं।

और

महिलाएं अनंत सूत्र बाएं हाथ में बांधती हैं।

लेकिन भारत के अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में परंपरा अलग हो सकती है।

यदि आपके परिवार या कुल परंपरा में अनंत सूत्र धारण करने का तरीका अलग है, तो अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन करना उचित रहेगा।


अनंत चतुर्दशी 2026 पूजा सामग्री

घर पर सामान्य अनंत पूजा करने के लिए बहुत जटिल सामग्री आवश्यक नहीं है।

अपनी परंपरा और उपलब्धता के अनुसार आप रख सकते हैं—

  • भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा
  • 14 गांठों वाला अनंत सूत्र
  • स्वच्छ जल
  • कलश
  • रोली या कुमकुम
  • हल्दी
  • अक्षत
  • पुष्प
  • तुलसी दल
  • दीपक
  • धूप
  • फल
  • नारियल
  • मिठाई
  • घर का सात्विक प्रसाद
  • पंचामृत, यदि आपकी परंपरा में हो

सभी चीजें न मिल पाने पर पूजा छोड़ने की जरूरत नहीं है।

धार्मिक अनुष्ठान में श्रद्धा और संकल्प को मूल भाव माना जाता है।


घर पर अनंत चतुर्दशी पूजा कैसे करें?

यदि आपके घर में कोई विशेष पारिवारिक पूजा विधि नहीं है, तो सामान्य रूप से इस सरल क्रम को अपनाया जा सकता है।

1. स्नान और पूजा स्थान की तैयारी

सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें।

पूजा स्थान को साफ करें और भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।

2. दीपक जलाएं

भगवान के सामने दीपक और धूप जलाएं।

मन को शांत कर भगवान विष्णु का स्मरण करें।

3. संकल्प लें

जल लेकर मन में व्रत और पूजा का संकल्प करें।

संकल्प का अर्थ केवल मनोकामना मांगना नहीं बल्कि स्वयं से यह तय करना भी है कि आप किसी अच्छे कार्य या अनुशासन को जीवन में आगे बढ़ाएंगे।

4. भगवान विष्णु का पूजन

भगवान विष्णु को—

  • पुष्प
  • अक्षत
  • तुलसी
  • फल
  • प्रसाद

अर्पित करें।

5. अनंत सूत्र की पूजा

14 गांठों वाला अनंत सूत्र भगवान विष्णु के सामने रखें।

उस पर हल्दी, कुमकुम, अक्षत और पुष्प चढ़ाएं।

6. कथा सुनें या पढ़ें

अनंत चतुर्दशी की परंपरा में ऋषि कौंडिन्य और उनकी पत्नी सुशीला की कथा सुनने की मान्यता है।

7. अनंत सूत्र धारण करें

पूजा पूर्ण होने के बाद अनंत सूत्र धारण करें।

परिवार में जो परंपरा चली आ रही हो, उसी के अनुसार इसे बांधें।

8. आरती और प्रसाद

भगवान विष्णु की आरती करें और परिवार में प्रसाद बांटें।


अनंत चतुर्दशी की कथा क्या है?

अनंत चतुर्दशी से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा ऋषि कौंडिन्य और उनकी पत्नी सुशीला से संबंधित है।

धार्मिक कथा के अनुसार सुशीला ने अनंत भगवान का व्रत और पूजा देखी तथा विधिपूर्वक अनंत सूत्र धारण किया।

इसके बाद उनके जीवन में सुख-समृद्धि आई।

लेकिन कौंडिन्य ने अनंत सूत्र के महत्व पर संदेह किया और क्रोध में उसे हटा दिया।

कथा में इसके बाद उनके जीवन में कठिनाइयां आने का वर्णन मिलता है।

बाद में उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने भगवान अनंत की खोज तथा उपासना की।

अंततः उन्हें अनंत व्रत का महत्व समझ आया।

इस कथा को केवल “धागा बांधो और धन मिल जाएगा” जैसी सरल व्याख्या तक सीमित करना उचित नहीं होगा।

इसका व्यापक आध्यात्मिक संदेश माना जा सकता है—

अहंकार से बचना, संकल्प का सम्मान करना और कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखना।


क्या अनंत चतुर्दशी का व्रत 14 साल करना जरूरी है?

कई धार्मिक परंपराओं में अनंत व्रत को लगातार 14 वर्षों तक करने की मान्यता बताई जाती है।

लेकिन सभी परिवारों और क्षेत्रों में इसका पालन समान रूप से नहीं किया जाता।

कुछ लोग पारिवारिक परंपरा के अनुसार नियमित व्रत करते हैं, कुछ लोग विशेष संकल्प लेकर इसे शुरू करते हैं और कई श्रद्धालु केवल पूजा में शामिल होते हैं।

यदि आप पहली बार यह व्रत शुरू कर रहे हैं और किसी विशेष पारंपरिक संकल्प के साथ करना चाहते हैं, तो अपने परिवार के बुजुर्ग या जानकार पुरोहित से विधि पूछना बेहतर रहेगा।


व्रत न रख पाएं तो क्या पूजा कर सकते हैं?

हां।

किसी स्वास्थ्य, आयु, काम या अन्य उचित कारण से पूरा उपवास संभव न हो तो पूजा करना बंद करने की आवश्यकता नहीं है।

आप—

भगवान विष्णु का स्मरण कर सकते हैं।

दीपक जला सकते हैं।

तुलसी अर्पित कर सकते हैं।

अनंत सूत्र की पूजा कर सकते हैं।

दान कर सकते हैं।

और अपनी क्षमता के अनुसार सात्विक भोजन रख सकते हैं।

स्वास्थ्य संबंधी स्थिति में उपवास को लेकर चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता देना चाहिए।


अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन का क्या संबंध है?

यह इस दिन की सबसे रोचक बातों में से एक है।

अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा का पर्व है।

वहीं यही दिन गणेशोत्सव के प्रमुख समापन और गणपति विसर्जन से भी जुड़ा हुआ है।

2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई गई और मुख्य अनंत चतुर्दशी विसर्जन 25 सितंबर 2026 को होगा।

गणेश चतुर्थी की स्थापना, पूजा, भोग और विसर्जन की पूरी जानकारी के लिए The Rising Irish की यह विस्तृत guide पढ़ें:

गणेश चतुर्थी 2026: तारीख, शुभ मुहूर्त, स्थापना विधि और पूजा की पूरी जानकारी

और यदि आपके मन में यह सवाल है कि गणपति प्रतिमा का विसर्जन आखिर किया ही क्यों जाता है, तो यह article भी जरूर पढ़ें:

गणपति विसर्जन क्यों किया जाता है? परंपरा, विधि और आध्यात्मिक महत्व


एक ही दिन “अनंत” और “विसर्जन” हमें क्या सिखाते हैं?

यहां अनंत चतुर्दशी का एक बहुत सुंदर दार्शनिक पहलू सामने आता है।

एक तरफ भगवान विष्णु का “अनंत” स्वरूप है—

जो निरंतरता का प्रतीक है।

दूसरी तरफ गणपति विसर्जन है—

जो हमें विदाई और परिवर्तन स्वीकार करना सिखाता है।

पहली नजर में दोनों भाव एक-दूसरे के विपरीत दिखाई देते हैं।

लेकिन जीवन में दोनों साथ चलते हैं।

परिवर्तन होता रहता है, लेकिन जीवन की यात्रा चलती रहती है।

गणपति की मिट्टी की प्रतिमा अपने स्वरूप से विदा होती है।

लेकिन श्रद्धा समाप्त नहीं होती।

अनंत सूत्र हाथ में रहता है।

लेकिन उसका वास्तविक उद्देश्य धागे से ज्यादा उस संकल्प को याद रखना है जिसके साथ उसे बांधा गया।

इसीलिए 25 सितंबर का यह दिन केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं बल्कि “स्थायी क्या है और बदलता क्या है?” इस प्रश्न पर विचार करने का अवसर भी बन सकता है।


क्या सभी गणपति का विसर्जन अनंत चतुर्दशी को ही करना जरूरी है?

नहीं।

गणेश प्रतिमा कितने दिन रखी जाती है, यह परिवार और स्थानीय परंपरा पर निर्भर करता है।

बहुत से श्रद्धालु—

  • डेढ़ दिन
  • 3 दिन
  • 5 दिन
  • 7 दिन
  • या अनंत चतुर्दशी

पर गणेश विसर्जन करते हैं।

इसलिए अनंत चतुर्दशी मुख्य सार्वजनिक गणेश विसर्जन का बड़ा दिन जरूर है, लेकिन हर घर में विसर्जन इसी दिन होना अनिवार्य नहीं है।


पर्यावरण के अनुकूल गणेश विसर्जन क्यों जरूरी है?

धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है।

यदि प्रतिमा मिट्टी से बनी है तो उसे स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थान या artificial immersion tank में विसर्जित करना बेहतर विकल्प है।

नदी या तालाब में—

प्लास्टिक,

थर्माकोल,

synthetic सजावट,

chemical colour,

और non-biodegradable सामग्री

नहीं डालनी चाहिए।

गणपति विसर्जन की भावना भगवान को सम्मानपूर्वक विदा करना है, प्रकृति को नुकसान पहुंचाना नहीं।


अनंत सूत्र कितने दिन पहनें?

अनंत सूत्र कितने समय तक पहनना चाहिए, इसे लेकर अलग-अलग परंपराएं मिलती हैं।

कई परिवार कुछ दिनों बाद इसे सम्मानपूर्वक उतारते हैं।

कुछ परंपराओं में इसे अधिक समय तक धारण किया जाता है।

इसलिए इसकी कोई एक सार्वभौमिक अवधि बताना ठीक नहीं होगा।

अपने परिवार की स्थापित परंपरा को प्राथमिकता दें।


पुराना अनंत सूत्र क्या करें?

अनंत सूत्र धार्मिक पूजा से जुड़ा धागा है, इसलिए इसे सामान्य कूड़े में फेंकने से बचना बेहतर माना जाता है।

आप इसे सम्मानपूर्वक हटाकर पूजा स्थान में कुछ समय रख सकते हैं या अपने परिवार की परंपरा के अनुसार उसका निस्तारण कर सकते हैं।

लेकिन धार्मिक सामग्री के नाम पर नदी या तालाब में प्लास्टिक, synthetic threads या अन्य प्रदूषणकारी वस्तुएं न डालें।


क्या अनंत सूत्र पहनने से धन बढ़ता है?

अनंत सूत्र धार्मिक आस्था और संकल्प का प्रतीक है।

इसे पहनने मात्र से निश्चित धन लाभ, नौकरी, बीमारी ठीक होने या किसी अन्य भौतिक परिणाम की guarantee मानना उचित नहीं है।

आस्था व्यक्ति को मानसिक शक्ति, अनुशासन और सकारात्मक दिशा दे सकती है, लेकिन आर्थिक सफलता के लिए वास्तविक जीवन में—

मेहनत,

कौशल,

योजना,

बचत,

और समझदारी से निर्णय

भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।


क्या 14 गांठों का वैज्ञानिक प्रमाण है?

14 गांठों की परंपरा धार्मिक symbolism से जुड़ी है।

इसे शरीर की कोई निश्चित वैज्ञानिक ऊर्जा प्रणाली सक्रिय करने या रोग ठीक करने का scientifically established तरीका नहीं माना जाना चाहिए।

धार्मिक विश्वास और वैज्ञानिक दावे दोनों अलग विषय हैं।

किसी परंपरा का सांस्कृतिक या आध्यात्मिक महत्व होने के लिए उसका medical mechanism होना जरूरी नहीं है।


अनंत चतुर्दशी पर क्या दान कर सकते हैं?

अपनी क्षमता और स्थानीय परंपरा के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को—

  • भोजन
  • वस्त्र
  • फल
  • अनाज
  • या दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तु

दान की जा सकती है।

दान दिखावे से ज्यादा उपयोगिता और भावना के साथ किया जाए तो उसका सामाजिक महत्व भी बढ़ जाता है।


अनंत चतुर्दशी पर क्या न करें?

धार्मिक परंपरा के साथ कुछ practical बातें भी याद रखें।

पूजा को केवल डर या अंधविश्वास से न करें।

अनंत सूत्र को जादुई वस्तु न मानें।

किसी दूसरी पारिवारिक परंपरा का मजाक न उड़ाएं।

स्वास्थ्य खराब हो तो जबरन निर्जला उपवास न करें।

गणपति विसर्जन के समय पानी के स्रोतों को प्रदूषित न करें।

धार्मिक आयोजन में भीड़ हो तो बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा का ध्यान रखें।

और किसी धार्मिक मान्यता को financial, medical या legal guarantee की तरह पेश न करें।


अनंत चतुर्दशी और ज्योतिष

किसी धार्मिक पर्व की तिथि पंचांग की तिथि, सूर्य-चंद्र गणना और स्थानीय सूर्योदय जैसे तत्वों से निर्धारित होती है।

यदि आपको पंचांग, राशि, ग्रह, भाव और ज्योतिष से जुड़े concepts समझने में रुचि है तो The Rising Irish का:

ज्योतिष सीखें सेक्शन देखें

और अपनी जन्मकुंडली से जुड़े सामान्य ज्योतिषीय concepts AI की मदद से समझने के लिए:

Kundli Gyan GPT – Free AI Kundli in Hindi खोलें

का उपयोग कर सकते हैं।

ध्यान रखें कि ज्योतिषीय interpretations को निश्चित भविष्यवाणी या medical, legal अथवा financial advice का विकल्प नहीं मानना चाहिए।


आज का राशिफल भी पढ़ें

अनंत चतुर्दशी के साथ यदि आप अपनी राशि के दैनिक सामान्य संकेत भी जानना चाहते हैं तो The Rising Irish पर मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का दैनिक राशिफल पढ़ सकते हैं।

आज का राशिफल पढ़ें

दैनिक राशिफल किसी राशि के लाखों लोगों के लिए सामान्य ज्योतिषीय संकेत देता है, जबकि व्यक्तिगत जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति अलग होती है।


धार्मिक ज्ञान की और पोस्ट पढ़ें

भगवान शिव, विष्णु, गणेश, धार्मिक पर्व, मंदिरों और भारतीय परंपराओं से जुड़ी अन्य विस्तृत सामग्री के लिए:

Dharmik Shorts Gyan देखें

और कम समय में visual format में जानकारी देखने के लिए:

The Rising Irish Web Stories देखें


WhatsApp Channel से जुड़ें

अगर आप राशिफल, ज्योतिष, धार्मिक पर्व, मंदिरों और महत्वपूर्ण उपयोगी updates सीधे WhatsApp पर पाना चाहते हैं तो The Rising Irish के WhatsApp Channel से जुड़ सकते हैं।

The Rising Irish WhatsApp Channel से जुड़ें

Channel को Follow करने के बाद notifications on कर सकते हैं, ताकि नई महत्वपूर्ण post छूटे नहीं।


Anant Chaturdashi 2026 FAQs

अनंत चतुर्दशी 2026 कब है?

अनंत चतुर्दशी शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी।

चतुर्दशी तिथि कब शुरू होगी?

चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर 2026 को रात लगभग 11:18 बजे शुरू होगी।

चतुर्दशी तिथि कब समाप्त होगी?

25 सितंबर 2026 को रात लगभग 11:06 बजे चतुर्दशी तिथि समाप्त होगी।

अनंत चतुर्दशी पर किस भगवान की पूजा की जाती है?

इस दिन मुख्य रूप से भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है।

अनंत सूत्र में कितनी गांठें होती हैं?

परंपरागत अनंत सूत्र में 14 गांठें होती हैं।

अनंत सूत्र की 14 गांठों का क्या अर्थ है?

एक प्रचलित धार्मिक व्याख्या में इन 14 गांठों को 14 लोकों और भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप से जोड़ा जाता है।

पुरुष अनंत सूत्र किस हाथ में बांधें?

कई प्रचलित परंपराओं के अनुसार पुरुष दाएं हाथ में अनंत सूत्र बांधते हैं।

महिलाएं अनंत सूत्र किस हाथ में बांधें?

कई परंपराओं में महिलाएं बाएं हाथ में अनंत सूत्र धारण करती हैं। स्थानीय और पारिवारिक परंपरा अलग हो सकती है।

क्या महिलाएं अनंत चतुर्दशी व्रत रख सकती हैं?

हां, अनेक परंपराओं में पुरुष और महिलाएं दोनों यह व्रत करते हैं।

गणेश विसर्जन 2026 कब है?

अनंत चतुर्दशी के दिन होने वाला प्रमुख गणपति विसर्जन 25 सितंबर 2026 को है।

क्या सभी गणपति का विसर्जन 25 सितंबर को ही करना जरूरी है?

नहीं। परिवार की परंपरा के अनुसार डेढ़ दिन, तीसरे, पांचवें, सातवें दिन या अनंत चतुर्दशी को विसर्जन किया जा सकता है।

क्या अनंत सूत्र न मिले तो पूजा नहीं कर सकते?

ऐसा नहीं है। साफ सूती धागे में 14 गांठें लगाकर घर पर अनंत सूत्र बनाया जा सकता है। वह भी संभव न हो तो सामान्य विष्णु पूजा की जा सकती है।

क्या अनंत सूत्र पहनने से धन आने की guarantee है?

नहीं। अनंत सूत्र धार्मिक आस्था और संकल्प का प्रतीक है। इसे निश्चित आर्थिक लाभ देने वाली वस्तु मानना उचित नहीं है।

पूजा का exact मुहूर्त सभी शहरों में समान है?

नहीं। स्थानीय सूर्योदय और स्थान के अनुसार पूजा समय में कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए अपने शहर का पंचांग देखना बेहतर है।


अंत में जाते-जाते

अनंत चतुर्दशी 2026 शुक्रवार, 25 सितंबर को मनाई जाएगी।

लेकिन इस दिन को केवल तारीख, पूजा सामग्री और 14 गांठों तक सीमित कर देना शायद इसके सबसे सुंदर संदेश को पीछे छोड़ देना होगा।

इस पर्व में एक तरफ अनंत है—जो हमें याद दिलाता है कि जीवन, समय और ईश्वर की व्यापकता हमारी सीमित सोच से कहीं बड़ी है।

और दूसरी तरफ विसर्जन है—जो बताता है कि हर दिखाई देने वाले स्वरूप से एक दिन विदा लेना पड़ता है।

गणपति की प्रतिमा विदा होती है, श्रद्धा नहीं।

अनंत सूत्र एक दिन हाथ से उतर सकता है, लेकिन उसके साथ लिया गया अच्छा संकल्प जीवन में बना रह सकता है।

शायद यही कारण है कि अनंत चतुर्दशी का सबसे सुंदर अर्थ 14 गांठों की गिनती में नहीं, बल्कि उन गांठों के बीच छिपे एक सवाल में है—

हम अपने जीवन में ऐसा कौन-सा अच्छा संकल्प बांध रहे हैं, जिसे परिस्थितियां बदलने के बाद भी नहीं छोड़ेंगे?

आप सभी को अनंत चतुर्दशी की हार्दिक शुभकामनाएं।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई पूजा, व्रत, अनंत सूत्र, कथा और धार्मिक महत्व से संबंधित जानकारी हिंदू धार्मिक परंपराओं, प्रचलित मान्यताओं और पंचांग आधारित जानकारी पर आधारित है। भारत के अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा-विधि व परंपरा अलग हो सकती है। किसी विशेष अनुष्ठान के लिए अपनी पारिवारिक परंपरा या स्थानीय विद्वान/पुरोहित का मार्गदर्शन लें। स्वास्थ्य संबंधी स्थिति में उपवास से पहले चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता दें।