इंदिरा एकादशी 2026: पितरों के लिए क्यों मानी जाती है खास? जानें तिथि, पूजा विधि, पारण और जरूरी नियम

इंदिरा एकादशी 2026: पितृ पक्ष में आने वाली इंदिरा एकादशी हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाली एकादशी मानी जाती है। वर्ष 2026 में इंदिरा एकादशी मंगलवार, 6 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

आम तौर पर एकादशी भगवान विष्णु की उपासना, संयम और व्रत से जुड़ी होती है, लेकिन इंदिरा एकादशी की खास बात यह है कि यह पितृ पक्ष के दौरान आती है। इसी कारण धार्मिक परंपराओं में इसका संबंध केवल व्रती के आध्यात्मिक कल्याण से नहीं, बल्कि पूर्वजों के स्मरण, पितरों के प्रति श्रद्धा और उनके निमित्त पुण्य कर्म करने से भी जोड़ा गया है।

लेकिन इंदिरा एकादशी को समझते समय केवल यह जान लेना पर्याप्त नहीं कि व्रत कब है।

कई लोगों के मन में सवाल होते हैं:

  • इंदिरा एकादशी 2026 कब है?
  • एकादशी तिथि कब शुरू और समाप्त होगी?
  • व्रत का पारण कब करना चाहिए?
  • पितृ पक्ष में इस एकादशी का क्या महत्व है?
  • क्या इस दिन श्राद्ध किया जा सकता है?
  • व्रत रखने वाले क्या खा सकते हैं?
  • क्या बिना निर्जला व्रत के भी पूजा की जा सकती है?
  • भगवान विष्णु के साथ पितरों के लिए क्या करना चाहिए?
  • क्या कोई विशेष मंत्र या दान करना आवश्यक है?

इस लेख में इन्हीं सभी सवालों को सरल भाषा में समझेंगे।

धार्मिक पर्व, व्रत, मंदिर और सनातन संस्कृति से संबंधित अन्य लेख पढ़ने के लिए आप हमारे Dharmik Shorts Gyan सेक्शन को भी देख सकते हैं।


इंदिरा एकादशी 2026 कब है?

वर्ष 2026 में इंदिरा एकादशी 6 अक्टूबर, मंगलवार को मनाई जाएगी।

पंचांग गणना के अनुसार आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि इस प्रकार रहेगी:

इंदिरा एकादशी व्रत: 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार

एकादशी तिथि प्रारंभ: 6 अक्टूबर 2026 को लगभग रात 2:07 बजे

एकादशी तिथि समाप्त: 7 अक्टूबर 2026 को लगभग रात 12:34 बजे

पारण 7 अक्टूबर को द्वादशी तिथि में किया जाएगा।

ध्यान रखें कि सूर्योदय, हरिवासर और स्थान के अनुसार पारण का सही समय अलग-अलग शहरों में कुछ मिनट बदल सकता है।

उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों के पंचांग में पारण का समय सुबह लगभग 6 बजे के बाद से 10 बजे के आसपास तक दिखाई देता है।

इसलिए यदि आप विधिवत व्रत रखते हैं तो अपने शहर का exact पारण समय उसी दिन स्थानीय पंचांग से जरूर जांचें।

आप Drik Panchang की Ekadashi सूची पर भी अपने शहर के अनुसार समय देख सकते हैं।


इंदिरा एकादशी आखिर होती क्या है?

हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक चंद्र मास में दो एकादशी आती हैं।

एक शुक्ल पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में।

आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को इंदिरा एकादशी कहा जाता है।

चूंकि यह एकादशी पितृ पक्ष के दौरान आती है, इसलिए इसका धार्मिक महत्व अन्य कई एकादशियों से थोड़ा अलग माना गया है।

एक ओर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और दूसरी ओर अपने दिवंगत पूर्वजों को स्मरण कर उनके निमित्त दान, तर्पण या पुण्य कार्य किए जाते हैं।

यही दोहरा आध्यात्मिक संदर्भ इंदिरा एकादशी को विशेष बनाता है।


पितृ पक्ष में इंदिरा एकादशी क्यों खास मानी जाती है?

पितृ पक्ष लगभग 15-16 दिनों का वह काल माना जाता है जिसमें हिंदू परिवार अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं।

इस दौरान तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध, ब्राह्मण भोजन और जरूरतमंद लोगों को दान जैसी परंपराएं निभाई जाती हैं।

इंदिरा एकादशी इसी पितृ पक्ष में आती है।

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की आराधना और व्रत से प्राप्त पुण्य को पितरों के निमित्त समर्पित किया जा सकता है।

इसका भाव बहुत सरल है।

हम जिन पूर्वजों के कारण आज यहां हैं, उन्हें श्रद्धा और कृतज्ञता से याद करना।

यहां यह समझना भी जरूरी है कि धार्मिक ग्रंथों में बताए गए आध्यात्मिक फल आस्था और परंपरा का विषय हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित परिणाम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।


इंदिरा एकादशी और पितरों का संबंध

इंदिरा एकादशी से जुड़ी धार्मिक कथा में भी पूर्वजों की मुक्ति का विषय प्रमुख रूप से सामने आता है।

परंपरागत कथा में राजा इंद्रसेन का उल्लेख मिलता है।

मान्यता के अनुसार राजा इंद्रसेन भगवान विष्णु के भक्त थे। एक दिन देवर्षि नारद उनके पास पहुंचे और उन्होंने राजा को उनके दिवंगत पिता के विषय में बताया।

नारद जी ने राजा को आश्विन कृष्ण पक्ष की इंदिरा एकादशी का व्रत करने और उसका पुण्य अपने पिता के निमित्त अर्पित करने का मार्ग बताया।

राजा ने विधिपूर्वक व्रत किया।

धार्मिक कथा के अनुसार इस पुण्य के प्रभाव से उनके पिता को उत्तम गति प्राप्त हुई।

इसी कथा के कारण इंदिरा एकादशी को पितरों के कल्याण और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा से जोड़कर देखा जाता है।


क्या इंदिरा एकादशी केवल पितरों के लिए है?

नहीं।

यह भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी भी है।

इस दिन भक्त अपनी क्षमता के अनुसार:

  • व्रत रखते हैं
  • भगवान विष्णु की पूजा करते हैं
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं
  • भगवान के नाम का जप करते हैं
  • दान करते हैं
  • सात्विक जीवन अपनाते हैं
  • पितरों को याद करते हैं

इंदिरा एकादशी का मूल भाव केवल भोजन न करना नहीं, बल्कि संयम, श्रद्धा और आत्मचिंतन भी माना जाता है।


इंदिरा एकादशी 2026 की पूजा विधि

यदि आप सरल रूप से इंदिरा एकादशी का पालन करना चाहते हैं तो बहुत जटिल पूजा की आवश्यकता नहीं है।

श्रद्धा के साथ यह सामान्य विधि अपनाई जा सकती है।

1. सुबह जल्दी उठें

सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।

संभव हो तो पूजा स्थान को साफ करें।

2. भगवान विष्णु का ध्यान करें

भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं।

3. व्रत का संकल्प लें

मन ही मन कहें कि आप अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार इंदिरा एकादशी का पालन करेंगे।

4. भगवान को अर्पित करें

पूजा में उपलब्धता के अनुसार:

  • तुलसी दल
  • पीले पुष्प
  • फल
  • दीपक
  • धूप
  • जल

अर्पित किए जा सकते हैं।

तुलसी भगवान विष्णु की पूजा में विशेष मानी जाती है।

5. मंत्र जप करें

सबसे सरल मंत्र है:

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

इसे अपनी सुविधा के अनुसार 11, 21, 108 या जितनी बार संभव हो, जप सकते हैं।

6. पूर्वजों का स्मरण करें

अपने दिवंगत पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करें।

उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें।

यदि आपके परिवार में श्राद्ध या तर्पण की विशेष परंपरा है तो उसे परिवार के जानकार सदस्य या योग्य पुरोहित की सलाह से करें।

7. दान करें

किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, वस्त्र या उपयोगी वस्तु देना एक सरल और सार्थक तरीका हो सकता है।


इंदिरा एकादशी पर क्या दान किया जा सकता है?

धार्मिक परंपराओं में दान को पुण्य कर्म माना गया है।

आप अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को:

  • भोजन
  • फल
  • कपड़े
  • अनाज
  • पानी
  • दैनिक उपयोग की वस्तुएं

दे सकते हैं।

दान दिखावे के लिए नहीं बल्कि सहायता के भाव से करना ज्यादा सार्थक है।

यदि किसी जरूरतमंद परिवार को ऐसी चीज दी जाए जिसकी उन्हें वास्तव में आवश्यकता है, तो यह केवल धार्मिक कर्म नहीं बल्कि सामाजिक रूप से भी उपयोगी कार्य बन जाता है।


इंदिरा एकादशी में क्या खा सकते हैं?

एकादशी व्रत अलग-अलग परिवारों और संप्रदायों में अलग तरह से रखा जाता है।

कुछ लोग निर्जला व्रत करते हैं।

कुछ फलाहार करते हैं।

कुछ केवल एक समय फलाहार या व्रत का भोजन लेते हैं।

सामान्य फलाहार में लोग अपनी परंपरा के अनुसार:

  • फल
  • दूध
  • दही
  • मखाना
  • सूखे मेवे
  • साबूदाना
  • कुट्टू
  • सिंघाड़ा
  • सेंधा नमक

आदि लेते हैं।


एकादशी में क्या नहीं खाना चाहिए?

परंपरागत रूप से एकादशी पर अन्न, विशेषकर चावल और सामान्य अनाज का सेवन नहीं किया जाता।

व्रत करने वाले लोग सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग करते हैं।

लेकिन हर व्यक्ति की स्थिति अलग होती है।

यदि आपको diabetes, pregnancy, chronic illness, कमजोरी या नियमित medication की जरूरत है तो कठोर उपवास शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

धर्म का पालन स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाकर नहीं किया जाना चाहिए।


क्या निर्जला व्रत करना जरूरी है?

नहीं।

हर व्यक्ति के लिए निर्जला व्रत करना आवश्यक नहीं है।

एकादशी का पालन अपनी:

  • उम्र
  • स्वास्थ्य
  • काम
  • शारीरिक क्षमता
  • चिकित्सा स्थिति

के अनुसार किया जा सकता है।

फलाहार करके भी पूजा की जा सकती है।

यदि कोई व्यक्ति स्वास्थ्य के कारण व्रत नहीं रख सकता तो वह भगवान विष्णु का स्मरण, सात्विक भोजन, दान और अच्छे कर्म कर सकता है।


वृद्ध और बीमार लोग क्या करें?

यदि कोई व्यक्ति वृद्ध है, दवा लेता है या लंबे समय तक भूखे रहने में समस्या होती है तो उसे कठोर उपवास नहीं करना चाहिए।

वह सामान्य सात्विक भोजन लेकर भी:

  • भगवान विष्णु का स्मरण
  • मंत्र जाप
  • धार्मिक पाठ
  • पितरों का स्मरण
  • दान

कर सकता है।

आस्था का अर्थ शरीर को हानि पहुंचाना नहीं है।


बच्चों को व्रत करवाना चाहिए?

छोटे बच्चों के लिए कठोर या निर्जला व्रत उचित नहीं माना जाना चाहिए।

उन्हें धार्मिक पर्व का अर्थ समझाना, भगवान की पूजा में शामिल करना, पूर्वजों के बारे में बताना और दान में सहभागी बनाना ज्यादा उपयोगी तरीका है।


इंदिरा एकादशी के दिन क्या करें?

इस दिन अपनी क्षमता के अनुसार इन चीजों को प्राथमिकता दी जा सकती है:

भगवान विष्णु का स्मरण करें

सुबह और शाम कुछ समय भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की आराधना करें।

तुलसी पूजा

तुलसी के सामने दीपक जलाया जा सकता है।

पूर्वजों को याद करें

अपने दिवंगत परिवारजनों के अच्छे कार्यों और उनसे मिले संस्कारों को याद करें।

दान करें

जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करें।

क्रोध पर नियंत्रण रखें

केवल भोजन छोड़ देना ही व्रत नहीं है। व्यवहार में भी संयम महत्वपूर्ण माना गया है।


इंदिरा एकादशी पर किन चीजों से बचें?

धार्मिक रूप से व्रत करने वाले लोगों को केवल भोजन संबंधी नियमों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।

इन व्यवहारों से भी बचना बेहतर है:

  • अनावश्यक क्रोध
  • किसी का अपमान
  • झूठ बोलना
  • नकारात्मक बहस
  • नशे का सेवन
  • जरूरतमंद व्यक्ति को जानबूझकर परेशान करना
  • दिखावे के लिए धार्मिक कर्म करना

व्रत का उद्देश्य मन और व्यवहार दोनों में संयम लाना माना गया है।


इंदिरा एकादशी व्रत का पारण कब होगा?

इंदिरा एकादशी का व्रत 7 अक्टूबर 2026, बुधवार को द्वादशी में खोला जाएगा।

पारण सूर्योदय के बाद और हरिवासर समाप्त होने के बाद करना चाहिए।

चूंकि पारण समय स्थान के अनुसार बदलता है, इसलिए पूरे भारत के लिए एक ही exact समय लिखना सही नहीं होगा।

उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों के उपलब्ध पंचांग में यह समय लगभग सुबह 6 बजे से 10 बजे के बीच दिखाई देता है।

उदाहरण के तौर पर Lucknow के लिए Drik Panchang की ISKCON गणना में पारण लगभग सुबह 6:14 से 9:56 बजे तक बताया गया है।

इसलिए अपने शहर के लिए exact समय जरूर जांचें।

महत्वपूर्ण: धार्मिक अनुष्ठान में minute-level timing चाहिए तो local Panchang को प्राथमिकता दें।


व्रत पारण कैसे करें?

पारण के दिन सुबह भगवान विष्णु की पूजा करें।

फिर अपनी परंपरा के अनुसार:

  • जल
  • फल
  • प्रसाद
  • सात्विक भोजन

से व्रत खोला जा सकता है।

कई परिवार पारण से पहले जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन कराते हैं।

यह स्थानीय और पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करता है।


क्या इंदिरा एकादशी पर श्राद्ध किया जाता है?

यह एक महत्वपूर्ण सवाल है।

पितृ पक्ष के दौरान यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु तिथि एकादशी रही हो तो परिवार की परंपरा के अनुसार एकादशी श्राद्ध किया जा सकता है।

हालांकि श्राद्ध की विधि क्षेत्र, परिवार और संप्रदाय के अनुसार काफी अलग हो सकती है।

इसलिए किसी विशेष व्यक्ति के श्राद्ध की exact प्रक्रिया के लिए स्थानीय योग्य पुरोहित या परिवार के परंपरागत पंडित से सलाह लेना बेहतर है।

इंटरनेट पर एक generic विधि पढ़कर हर परिवार पर वही लागू करना उचित नहीं होगा।


इंदिरा एकादशी और सर्वपितृ अमावस्या में क्या अंतर है?

कई लोग इन दोनों को लेकर भ्रमित होते हैं।

इंदिरा एकादशी आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी को आती है और भगवान विष्णु की उपासना से जुड़ी है।

वहीं सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष के अंतिम चरण में आती है।

सर्वपितृ अमावस्या विशेष रूप से उन पूर्वजों के श्राद्ध के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात न हो या जिनका श्राद्ध निर्धारित तिथि पर न हो पाया हो।

इसलिए दोनों का धार्मिक महत्व है, लेकिन दोनों एक ही पर्व नहीं हैं।


पितरों के लिए सबसे सरल काम क्या किया जा सकता है?

हर व्यक्ति जटिल श्राद्ध विधि नहीं कर सकता।

ऐसे में पूर्वजों की स्मृति में कुछ सरल और सार्थक काम किए जा सकते हैं:

किसी भूखे व्यक्ति को भोजन दें।

पक्षियों या पशुओं के लिए भोजन और पानी रखें।

किसी बुजुर्ग की सहायता करें।

पेड़ लगाएं या पर्यावरण से जुड़ा सकारात्मक काम करें।

परिवार के बच्चों को अपने पूर्वजों और पारिवारिक इतिहास के बारे में बताएं।

पूर्वजों को याद करना केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं होना चाहिए।

उनसे मिले अच्छे संस्कारों को आगे बढ़ाना भी उनके प्रति सम्मान का एक सुंदर रूप हो सकता है।


क्या इंदिरा एकादशी पर भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं?

हां।

इंदिरा एकादशी मुख्य रूप से भगवान विष्णु से संबंधित है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि इस दिन अन्य देवताओं की पूजा नहीं की जा सकती।

यदि आप महादेव के भक्त हैं तो भगवान विष्णु की पूजा के साथ भगवान शिव का स्मरण भी कर सकते हैं।

सनातन परंपरा में विभिन्न देव उपासनाएं परस्पर विरोधी नहीं मानी जातीं।

आप सरल रूप से:

ॐ नमः शिवाय

का जप कर सकते हैं।

महादेव, मंदिर और सनातन संस्कृति से जुड़ी अन्य सामग्री के लिए Dharmik Shorts Gyan भी देख सकते हैं।


व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं है

इंदिरा एकादशी के संदर्भ में एक बात बहुत महत्वपूर्ण है।

यदि कोई व्यक्ति पूरे दिन भूखा रहे लेकिन:

  • क्रोधित रहे
  • अपशब्द बोले
  • दूसरों को परेशान करे
  • झूठ बोले
  • किसी जरूरतमंद की मदद न करे

तो व्रत का आध्यात्मिक उद्देश्य अधूरा रह सकता है।

व्रत का मूल भाव आत्मसंयम माना जाता है।

इसलिए भोजन के नियमों के साथ अपने व्यवहार पर भी ध्यान देना बेहतर है।


इंदिरा एकादशी पर कौन-सा मंत्र जपें?

सबसे सरल और प्रसिद्ध विष्णु मंत्र है:

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

इसके अलावा अपनी परंपरा के अनुसार विष्णु सहस्रनाम या भगवान श्रीकृष्ण के नाम का स्मरण किया जा सकता है।

यदि आपके पास ज्यादा समय नहीं है तो संख्या को लेकर परेशान न हों।

कुछ मिनट शांत मन से किया गया स्मरण भी पर्याप्त हो सकता है।


इंदिरा एकादशी की पूजा में तुलसी का महत्व

भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

पूजा में उपलब्ध होने पर तुलसी दल भगवान विष्णु को अर्पित किया जाता है।

हालांकि धार्मिक परंपराओं में कुछ दिनों या विशेष समय पर तुलसी पत्ते तोड़ने को लेकर नियम बताए जाते हैं।

यदि आपके परिवार में ऐसी परंपरा है तो तुलसी पहले से रखी जा सकती है।

पूजा के समय पर्यावरण और पौधे का सम्मान करना भी महत्वपूर्ण है।


क्या ज्योतिष और एकादशी का कोई संबंध है?

व्रत-त्योहार मुख्य रूप से धार्मिक पंचांग की तिथि पर आधारित होते हैं।

ज्योतिष में तिथि, नक्षत्र, वार और ग्रह स्थितियों का अध्ययन अलग संदर्भ में किया जाता है।

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इंदिरा एकादशी 2026 से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल

इंदिरा एकादशी 2026 कब है?

इंदिरा एकादशी मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को है।

इंदिरा एकादशी किस भगवान को समर्पित है?

यह भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी है।

इंदिरा एकादशी पितृ पक्ष में आती है?

हां। यह पितृ पक्ष के दौरान आने वाली एकादशी है, इसलिए इसका संबंध पूर्वजों के स्मरण से भी जोड़ा जाता है।

इंदिरा एकादशी का पारण कब होगा?

व्रत का पारण 7 अक्टूबर 2026 को द्वादशी में किया जाएगा। exact समय शहर के अनुसार अलग होगा।

क्या निर्जला व्रत जरूरी है?

नहीं। व्यक्ति अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार या अन्य उपयुक्त तरीके से व्रत कर सकता है।

क्या बीमार व्यक्ति व्रत कर सकता है?

किसी स्वास्थ्य समस्या या नियमित दवा की स्थिति में डॉक्टर की सलाह के बिना कठोर उपवास नहीं करना चाहिए।

इस दिन कौन-सा मंत्र जप सकते हैं?

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप किया जा सकता है।

क्या इस दिन पितरों के लिए दान कर सकते हैं?

धार्मिक परंपरा के अनुसार जरूरतमंद को भोजन या उपयोगी वस्तु का दान किया जा सकता है।


इंदिरा एकादशी का वास्तविक संदेश

इंदिरा एकादशी की धार्मिक कथा और परंपराओं से एक बहुत सरल संदेश निकलता है।

हमारा जीवन केवल हमारे व्यक्तिगत प्रयासों का परिणाम नहीं है।

हमारे भीतर परिवार, पूर्वजों, समाज और संस्कारों की भी एक लंबी परंपरा मौजूद होती है।

पितृ पक्ष हमें उसी संबंध को याद करने का अवसर देता है।

और इंदिरा एकादशी उस स्मरण को भगवान विष्णु की भक्ति, संयम और सेवा के भाव के साथ जोड़ती है।

इसीलिए इस दिन केवल इस सवाल पर ध्यान न दें कि “व्रत में क्या खाएं और क्या न खाएं।”

इसके साथ यह भी सोचें:

हम अपने पूर्वजों से मिले अच्छे संस्कारों को आगे कैसे बढ़ा सकते हैं?


जरूरी Disclaimer

इस लेख में बताई गई व्रत, पूजा, कथा और धार्मिक मान्यताएं हिंदू धार्मिक परंपराओं और प्रचलित मान्यताओं पर आधारित हैं।

अलग-अलग क्षेत्रों, परिवारों और संप्रदायों में पूजा, श्राद्ध और व्रत की विधि अलग हो सकती है।

तिथि, सूर्योदय और पारण का समय स्थान के अनुसार बदलता है। इसलिए किसी धार्मिक अनुष्ठान के exact समय के लिए अपने शहर का स्थानीय पंचांग देखें।

यदि आपको diabetes, pregnancy, chronic illness या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है अथवा नियमित दवा लेनी पड़ती है तो कठोर या निर्जला व्रत रखने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह जरूर लें।


अंत में जाते-जाते

इंदिरा एकादशी 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी।

पितृ पक्ष में आने के कारण यह एकादशी भगवान विष्णु की भक्ति के साथ-साथ अपने पूर्वजों को याद करने का भी विशेष अवसर देती है।

यदि आप व्रत रख सकते हैं तो अपनी क्षमता के अनुसार रखें। यदि स्वास्थ्य इसकी अनुमति नहीं देता तो खुद को कष्ट न दें।

भगवान का स्मरण करें, पूर्वजों को श्रद्धा से याद करें और किसी जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करें।

कई बार सबसे सरल धार्मिक कर्म ही सबसे सार्थक बन जाते हैं।

यदि आप भगवान विष्णु और महादेव में श्रद्धा रखते हैं तो कमेंट में “जय श्री हरि, जय महादेव” जरूर लिखें।

और ऐसे ही धार्मिक पर्व, राशिफल और सनातन संस्कृति से जुड़ी जानकारी पाने के लिए The Rising Irish WhatsApp Channel को Follow करना न भूलें।