PM-RAHAT योजना 2026: सड़क दुर्घटना में ₹1.5 लाख तक कैशलेस इलाज कैसे मिलेगा? पात्रता, अस्पताल और शिकायत की पूरी गाइड

PM-RAHAT योजना 2026: कल्पना कीजिए कि आप सड़क पर यात्रा कर रहे हैं और अचानक सामने किसी बाइक सवार की दुर्घटना हो जाती है। घायल व्यक्ति सड़क पर पड़ा है। आसपास लोग जमा हैं, लेकिन सबसे बड़ी चिंता यही है कि उसे अस्पताल कौन पहुँचाएगा और इलाज का खर्च कौन उठाएगा?

ऐसी परिस्थितियों में कुछ मिनटों की देरी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।

सड़क दुर्घटना के बाद घायल को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री सड़क दुर्घटना पीड़ित अस्पताल में भर्ती एवं सुनिश्चित उपचार योजना, जिसे PM-RAHAT कहा जाता है, शुरू की है।

इस योजना के तहत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को निर्धारित अस्पतालों में ₹1.5 लाख तक का कैशलेस उपचार मिल सकता है। यह सुविधा दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों की निर्धारित अवधि के अधीन है।

लेकिन इस योजना को लेकर कई सवाल हैं।

क्या मोटरसाइकिल दुर्घटना में भी इलाज मिलेगा? क्या इसके लिए आयुष्मान कार्ड जरूरी है? क्या सड़क पर घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुँचाने वाला व्यक्ति 112 पर सहायता माँग सकता है? यदि अस्पताल पैसे माँगे या उपचार से मना कर दे, तो शिकायत कहाँ की जाएगी?

आइए सरकारी दस्तावेजों के आधार पर इस योजना को आसान हिंदी में समझते हैं।

PM-RAHAT योजना क्या है?

PM-RAHAT का पूरा अंग्रेजी नाम Prime Minister – Road Accident Victims’ Hospitalisation and Assured Treatment है।

इसका उद्देश्य मोटर वाहन से संबंधित सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को समय पर अस्पताल पहुँचाना और निर्धारित सीमा तक कैशलेस उपचार उपलब्ध कराना है।

इस योजना का आधार मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 162 है।

सड़क दुर्घटना पीड़ितों के कैशलेस उपचार संबंधी योजना को 5 मई 2025 को अधिसूचित किया गया था।

इसके कार्यान्वयन के विस्तृत दिशानिर्देश जून 2025 में जारी हुए।

इसके बाद 13 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री द्वारा PM-RAHAT नाम से योजना का शुभारंभ किया गया।

इस प्रकार यह समझना जरूरी है कि इसके कानूनी और प्रशासनिक प्रावधान पहले से विकसित किए जा रहे थे, जबकि PM-RAHAT के रूप में राष्ट्रीय शुभारंभ फरवरी 2026 में हुआ।

आधिकारिक जानकारी पढ़ने के लिए भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय की PM-RAHAT विज्ञप्ति देखें।

PM-RAHAT योजना 2026 की मुख्य जानकारी

विवरणजानकारी
योजना का नामPM-RAHAT
संबंधित मंत्रालयसड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
राष्ट्रीय शुभारंभ13 फरवरी 2026
प्रमुख लाभकैशलेस अस्पताल उपचार
अधिकतम उपचार सीमा₹1,50,000 प्रति पात्र पीड़ित
उपचार अवधिदुर्घटना की तारीख से अधिकतम 7 दिन
पात्र दुर्घटनामोटर वाहन के उपयोग से संबंधित सड़क दुर्घटना
सड़क का प्रकारकिसी भी श्रेणी की सड़क
आपातकालीन सहायता112
अस्पतालयोजना के अंतर्गत निर्धारित अस्पताल
कानूनी आधारमोटर वाहन अधिनियम की धारा 162

यहाँ ₹1.5 लाख अधिकतम उपचार कवरेज है, हर दुर्घटना में मिलने वाली निश्चित नकद राशि नहीं।

सड़क दुर्घटना होने पर सबसे पहले क्या करें?

योजना के बारे में जानने से भी अधिक महत्वपूर्ण है दुर्घटना के बाद सही प्रतिक्रिया देना।

यदि आपके सामने सड़क दुर्घटना होती है, तो सबसे पहले अपनी सुरक्षा और आसपास के यातायात की स्थिति देखें।

किसी तेज रफ्तार सड़क पर बिना सावधानी के बीच में जाना दूसरे हादसे का कारण बन सकता है।

सुरक्षित स्थान से तत्काल 112 पर कॉल करें।

यह भारत की आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली से संबंधित नंबर है।

अधिकारियों को दुर्घटना का स्थान, सड़क का नाम, नजदीकी पहचान योग्य स्थान और घायल व्यक्तियों की संख्या बताएं।

यदि घायल बेहोश है या गंभीर चोट दिखाई दे रही है, तो कॉल के दौरान इसकी जानकारी भी दें।

112 के माध्यम से निकटतम निर्धारित अस्पताल की जानकारी और एम्बुलेंस सहायता माँगी जा सकती है।

घायल व्यक्ति को अनावश्यक रूप से खींचने, उठाने या गर्दन मोड़ने का प्रयास न करें, विशेषकर यदि रीढ़ की चोट की आशंका हो।

यदि दुर्घटनास्थल पर आग, तेज यातायात या दूसरी तत्काल जानलेवा स्थिति है, तो आपातकालीन कर्मियों के निर्देशों को प्राथमिकता दें।

प्राथमिक उपचार केवल अपनी जानकारी और प्रशिक्षण की सीमा में करें।

याद रखें: पहले आपातकालीन मदद बुलाएँ। इलाज और योजना की औपचारिकताएँ अस्पताल तथा संबंधित अधिकारी संभालेंगे।

गोल्डन ऑवर क्या होता है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

सड़क दुर्घटनाओं के संदर्भ में गोल्डन ऑवर शब्द अक्सर सुनने को मिलता है।

यह दुर्घटना या गंभीर चोट के बाद शुरुआती लगभग एक घंटे की महत्वपूर्ण अवधि के लिए प्रयुक्त होता है।

इस दौरान जल्दी चिकित्सा सहायता मिलने से कुछ गंभीर चोटों में जान बचने की संभावना बेहतर हो सकती है।

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि एक घंटा पूरा होते ही उपचार बेकार हो जाता है।

चोट की प्रकृति के अनुसार हर समय तुरंत चिकित्सा सहायता महत्वपूर्ण रहती है।

PM-RAHAT योजना का एक उद्देश्य घायल को इसी शुरुआती महत्वपूर्ण अवधि में अस्पताल तक पहुँचाने की व्यवस्था मजबूत करना है।

योजना को 112 आपातकालीन सहायता प्रणाली से जोड़ने के पीछे भी यही सोच है।

यदि लोग दुर्घटना देखकर केवल वीडियो बनाने के बजाय सहायता बुलाने में सक्रिय भूमिका निभाएँ, तो घायल को शीघ्र चिकित्सा मिलने में मदद हो सकती है।

PM-RAHAT योजना के लिए कौन पात्र है?

योजना का प्रमुख पात्रता आधार मोटर वाहन के उपयोग से होने वाली सड़क दुर्घटना में घायल होना है।

इसमें दुर्घटना किसी भी श्रेणी की सड़क पर हुई हो सकती है।

अर्थात इसे केवल राष्ट्रीय राजमार्ग या एक्सप्रेसवे तक सीमित नहीं समझना चाहिए।

मोटरसाइकिल, कार, बस, ट्रक या अन्य मोटर वाहन से संबंधित दुर्घटनाओं में घायल व्यक्ति योजना की पात्रता के अंतर्गत आ सकता है।

हालाँकि किसी विशेष मामले में पात्रता का अंतिम निर्धारण योजना के नियमों, दुर्घटना के विवरण और संबंधित अधिकारियों के प्रमाणीकरण के अनुसार होगा।

केवल सड़क पर घायल पाए जाने से यह स्वतः सिद्ध नहीं हो जाता कि चोट मोटर वाहन दुर्घटना के कारण हुई है।

इसलिए अस्पताल और पुलिस द्वारा दुर्घटना का सत्यापन महत्वपूर्ण होता है।

सरकारी विवरणों में योजना का उद्देश्य पात्र दुर्घटना पीड़ितों के लिए उपचार उपलब्ध कराना बताया गया है, न कि केवल किसी विशेष आय वर्ग को लाभ देना।

क्या गरीब होना या आयुष्मान कार्ड होना जरूरी है?

PM-RAHAT को केवल गरीब परिवारों की योजना समझना सही नहीं है।

इसका प्राथमिक आधार सड़क दुर्घटना और योजना के अंतर्गत निर्धारित पात्रता है।

यह आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से अलग वैधानिक व्यवस्था है।

हालाँकि अस्पतालों के नेटवर्क और डिजिटल भुगतान प्रणाली के कुछ हिस्सों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की मौजूदा व्यवस्थाओं का उपयोग किया जाता है।

इसलिए यह मानना गलत होगा कि केवल आयुष्मान कार्ड रखने वाला व्यक्ति ही PM-RAHAT का लाभ प्राप्त कर सकता है।

दुर्घटना के समय घायल व्यक्ति के पास कार्ड या अन्य दस्तावेज न हों, तब भी समय पर चिकित्सा सहायता प्राप्त करने की कोशिश करनी चाहिए।

अस्पताल में पात्रता सत्यापन की प्रक्रिया अलग से पूरी की जाती है।

यदि दस्तावेजों की कमी के कारण परेशानी आ रही है, तो अस्पताल के योजना प्रभारी से सहायता माँगें और आवश्यकता पड़ने पर जिला स्तर पर शिकायत दर्ज कराएँ।

दुर्घटना के बाद ₹1.5 लाख तक इलाज कैसे मिलेगा?

योजना का लाभ प्राप्त करने की सामान्य प्रक्रिया कई चरणों में समझी जा सकती है।

चरण 1: दुर्घटना की सूचना दें

सबसे पहले 112 पर कॉल करके दुर्घटना की जानकारी दें।

घायल व्यक्ति, राहगीर, परिवार का सदस्य या मदद करने वाला कोई अन्य व्यक्ति सहायता माँग सकता है।

चरण 2: निर्धारित अस्पताल तक पहुँचें

आपातकालीन सेवा के माध्यम से योजना में निर्धारित निकटतम अस्पताल की जानकारी प्राप्त करें।

यदि एम्बुलेंस उपलब्ध कराई जाती है, तो उसके कर्मियों को दुर्घटना की स्थिति बताएं।

चरण 3: अस्पताल में प्रारंभिक उपचार

निर्धारित अस्पताल में घायल की चिकित्सकीय स्थिति का मूल्यांकन किया जाता है।

चोट की गंभीरता के अनुसार तत्काल उपचार और स्थिरीकरण की व्यवस्था की जाती है।

चरण 4: डिजिटल केस रिकॉर्ड

अस्पताल संबंधित डिजिटल प्रणाली में उपचार का रिकॉर्ड और आवश्यक विवरण दर्ज करता है।

यह प्रक्रिया अस्पताल तथा संबंधित सरकारी संस्थाओं की जिम्मेदारी है।

चरण 5: पुलिस प्रमाणीकरण

दुर्घटना के विवरण की पुष्टि संबंधित पुलिस व्यवस्था से की जाती है।

इसके लिए एकीकृत डिजिटल प्रणाली का उपयोग होता है।

चरण 6: कैशलेस उपचार

पात्रता और संबंधित नियमों के अनुसार निर्धारित सीमा तक उपचार उपलब्ध कराया जाता है।

इसका अर्थ मरीज के बैंक खाते में धन हस्तांतरण नहीं है।

चरण 7: अस्पताल को भुगतान

अस्पताल आवश्यक दावा प्रस्तुत करता है और स्वीकृति के बाद संबंधित निधि से भुगतान की प्रक्रिया होती है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य मरीज और उसके परिवार पर शुरुआती उपचार खर्च का तत्काल दबाव कम करना है।

क्या मरीज को पहले अस्पताल में पैसे जमा कराने होंगे?

PM-RAHAT का मूल उद्देश्य निर्धारित योजना के अंतर्गत कैशलेस उपचार उपलब्ध कराना है।

इसलिए पात्र उपचार के लिए सामान्यतः अस्पताल द्वारा योजना की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।

लेकिन यह समझना जरूरी है कि सभी अस्पताल, सभी सेवाएँ और हर खर्च स्वतः योजना के अंतर्गत शामिल नहीं हो जाते।

अस्पताल का योजना के लिए निर्धारित होना, उपचार का संबंधित हेल्थ बेनिफिट पैकेज में आना और पात्रता की पुष्टि महत्वपूर्ण हैं।

यदि अस्पताल कोई शुल्क माँगता है, तो स्पष्ट जानकारी लें कि वह किस सेवा के लिए है और क्या वह योजना के कवरेज से बाहर है।

संभव हो तो शुल्क का लिखित विवरण तथा रसीद सुरक्षित रखें।

आपातकालीन स्थिति में उपचार में देरी न होने दें और विवाद की स्थिति में अस्पताल प्रशासन तथा संबंधित सरकारी अधिकारी से तुरंत सहायता माँगें।

24 घंटे और 48 घंटे का नियम क्या है?

यह योजना का वह हिस्सा है जिसे अक्सर गलत तरीके से समझाया जाता है।

सरकारी दिशानिर्देशों में प्रारंभिक स्थिरीकरण उपचार और पुलिस प्रमाणीकरण के लिए अलग समयसीमा निर्धारित है।

गैर-जीवन-घातक मामलों में सामान्यतः 24 घंटे और जीवन-घातक मामलों में 48 घंटे का प्रावधान बताया गया है।

यह व्यवस्था एकीकृत डिजिटल प्रणाली पर पुलिस की प्रतिक्रिया और केस की स्थिति से जुड़ी है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक मरीज को केवल 24 या 48 घंटे ही इलाज मिलेगा।

योजना का अधिकतम उपचार कवरेज दुर्घटना की तारीख से सात दिनों और ₹1.5 लाख की सीमा के अधीन है।

अलग-अलग समयसीमाओं का उद्देश्य समझना महत्वपूर्ण है।

यदि किसी घायल व्यक्ति की हालत गंभीर है, तो अस्पताल को आवश्यक आपातकालीन देखभाल और निर्धारित प्रक्रिया पर ध्यान देना चाहिए।

परिवार को केवल यह सोचकर उपचार रोकना या टालना नहीं चाहिए कि अभी पुलिस का प्रमाणीकरण पूरा नहीं हुआ है।

क्या हिट-एंड-रन दुर्घटना में लाभ मिलेगा?

हिट-एंड-रन का अर्थ ऐसी दुर्घटना से है जिसमें टक्कर मारने वाला वाहन या चालक घटनास्थल से चला जाता है और उसकी पहचान तत्काल नहीं हो पाती।

PM-RAHAT की सरकारी जानकारी में ऐसे मामलों के वित्तपोषण का भी प्रावधान बताया गया है।

इसलिए केवल वाहन चालक के भाग जाने से यह मान लेना गलत है कि घायल का उपचार योजना में नहीं हो सकता।

ऐसी स्थिति में दुर्घटना की सूचना देना और उपलब्ध तथ्यों का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण है।

यदि वाहन का नंबर, रंग या अन्य विवरण किसी प्रत्यक्षदर्शी को पता है, तो उसे संबंधित अधिकारियों को बताया जा सकता है।

लेकिन घायल को सहायता देने के लिए चालक की पहचान होने की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए।

घटना की पुष्टि और उपचार पात्रता निर्धारित सरकारी प्रक्रिया से की जाती है।

मोटर वाहन दुर्घटना में पैदल यात्री को भी लाभ मिल सकता है?

मान लीजिए सड़क पार करते समय किसी पैदल व्यक्ति को मोटरसाइकिल या कार टक्कर मार देती है।

ऐसी परिस्थिति में वह व्यक्ति स्वयं वाहन नहीं चला रहा था, लेकिन दुर्घटना मोटर वाहन के उपयोग से संबंधित है।

इस प्रकार की स्थिति योजना की सामान्य पात्रता परिभाषा के अंतर्गत आ सकती है।

इसी तरह किसी वाहन के यात्री या अन्य सड़क उपयोगकर्ता के घायल होने की स्थिति में भी दुर्घटना के तथ्य देखे जाते हैं।

महत्वपूर्ण शर्त व्यक्ति के वाहन चालक होने की नहीं, बल्कि मोटर वाहन से संबंधित सड़क दुर्घटना का पात्र पीड़ित होना है।

हालाँकि प्रत्येक मामले में आधिकारिक सत्यापन और नियम लागू होंगे।

कौन-से अस्पताल PM-RAHAT योजना में शामिल हैं?

योजना का लाभ निर्धारित अस्पतालों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है।

इनमें नियमों के अनुरूप आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से सूचीबद्ध अस्पताल भी शामिल हो सकते हैं।

लेकिन यह समझना जरूरी है कि किसी अस्पताल का सामान्य आयुष्मान पैनल में नाम होना अपने आप प्रत्येक स्थानीय व्यवस्था या उपचार पैकेज की पुष्टि नहीं करता।

राज्य और केंद्रशासित प्रदेश अतिरिक्त अस्पतालों को भी निर्धारित कर सकते हैं।

इसलिए दुर्घटना की वास्तविक स्थिति में निकटतम योग्य अस्पताल की जानकारी 112 से प्राप्त करना अधिक उपयोगी तरीका है।

अस्पताल पहुँचने पर प्रशासन से पूछ सकते हैं कि PM-RAHAT के अंतर्गत उपचार किस प्रभारी या डेस्क द्वारा संचालित होता है।

अस्पताल की सूची समय के साथ बदल सकती है, इसलिए पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट में मिली सूची को अंतिम न मानें।

PM-RAHAT और आयुष्मान भारत में क्या अंतर है?

दोनों योजनाओं में कैशलेस उपचार शब्द का उपयोग हो सकता है, लेकिन उनका उद्देश्य और पात्रता व्यवस्था अलग है।

विषयPM-RAHATआयुष्मान भारत PM-JAY
प्रमुख उद्देश्यपात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों का उपचारपात्र परिवारों के लिए निर्धारित स्वास्थ्य कवरेज
पात्रता का आधारमोटर वाहन सड़क दुर्घटनायोजना के लाभार्थी नियम
PM-RAHAT सीमा₹1.5 लाख, अधिकतम 7 दिनसंबंधित PM-JAY लाभ नियम
प्रक्रियादुर्घटना और अस्पताल आधारित सत्यापनPM-JAY लाभार्थी सत्यापन
आपातकालीन संपर्क112लागू स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था

दोनों को एक ही योजना समझने के कारण कई लोग अनावश्यक भ्रम में पड़ जाते हैं।

सड़क दुर्घटना के समय सबसे पहले आपातकालीन सहायता और निर्धारित अस्पताल तक पहुँचने पर ध्यान देना चाहिए।

eDAR और TMS 2.0 क्या हैं?

PM-RAHAT योजना में तकनीक की भूमिका महत्वपूर्ण है।

eDAR का अर्थ Electronic Detailed Accident Report है।

इसका उपयोग दुर्घटना से संबंधित विवरण की डिजिटल रिपोर्टिंग और संबंधित पुलिस प्रक्रियाओं में किया जाता है।

TMS 2.0 राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की उपचार और दावा संबंधी डिजिटल प्रणाली है।

इन प्रणालियों को जोड़कर दुर्घटना की सूचना, अस्पताल में उपचार, पुलिस प्रमाणीकरण और दावे के भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड व्यवस्थित किए जाते हैं।

यह डिजिटल प्रक्रिया सामान्य नागरिक को स्वयं पूरी करने के लिए नहीं दी गई है।

इसका प्रमुख उपयोग अस्पताल, पुलिस और संबंधित सरकारी संस्थाओं के बीच समन्वय है।

इससे कागजी प्रक्रियाओं में समय कम करने और रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने का उद्देश्य पूरा किया जाता है।

अस्पताल को भुगतान कहाँ से होता है?

योजना के अंतर्गत भुगतान की व्यवस्था मोटर वाहन दुर्घटना निधि से संबंधित है।

सरकारी जानकारी के अनुसार बीमित दोषी वाहन से जुड़े मामलों में सामान्य बीमा कंपनियों के योगदान की भूमिका होती है।

बिना बीमा वाले वाहन तथा हिट-एंड-रन मामलों में सरकारी बजटीय सहायता का प्रावधान है।

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा दावा स्वीकृत होने के बाद अस्पताल को निर्धारित समयसीमा में भुगतान किया जाता है।

सरकारी विवरण में स्वीकृत दावे के भुगतान के लिए दस दिनों की व्यवस्था बताई गई है।

ध्यान दें कि यह अस्पताल को मिलने वाले भुगतान की प्रक्रिया है।

इसे पीड़ित व्यक्ति के खाते में दस दिनों के भीतर ₹1.5 लाख आने की योजना समझना गलत होगा।

अस्पताल इलाज से मना कर दे तो शिकायत कहाँ करें?

यह इस लेख का सबसे महत्वपूर्ण व्यावहारिक भाग है।

यदि निर्धारित अस्पताल में पात्र दुर्घटना पीड़ित को योजना के अंतर्गत उपचार देने से मना किया जाता है, तो मामले की शिकायत की जा सकती है।

सबसे पहले अस्पताल के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी या योजना प्रभारी से बात करें।

उन्हें दुर्घटना की जानकारी और उपचार से मना किए जाने का कारण स्पष्ट करने के लिए कहें।

संभव हो तो संबंधित जानकारी लिखित रूप में लें।

इसके बाद जिला सड़क सुरक्षा समिति से संबंधित शिकायत निवारण अधिकारी या संपर्क बिंदु की सहायता ली जा सकती है।

सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार जिला स्तर पर एक शिकायत निवारण व्यवस्था निर्धारित है।

यदि जिला स्तर पर संतोषजनक समाधान नहीं मिलता, तो मामला जिला कलेक्टर या जिलाधिकारी के स्तर पर और फिर राज्य सड़क सुरक्षा परिषद तक आगे बढ़ाया जा सकता है।

गंभीर आपातस्थिति में इलाज में देरी के बजाय 112 से सहायता माँगना प्राथमिकता होनी चाहिए।

शिकायत दर्ज करने के लिए कौन-सी जानकारी रखें?

यदि अस्पताल की सेवा या योजना की प्रक्रिया को लेकर शिकायत करनी पड़े, तो उपलब्ध दस्तावेज और विवरण सुरक्षित रखना उपयोगी है।

इनमें दुर्घटना की तारीख और समय, स्थान, अस्पताल का नाम तथा घायल व्यक्ति का विवरण शामिल हो सकता है।

यदि पुलिस द्वारा कोई दुर्घटना रिपोर्ट या संदर्भ संख्या दी गई है, तो उसे भी सुरक्षित रखें।

अस्पताल द्वारा दिए गए दस्तावेज, भुगतान की रसीद, लिखित अस्वीकृति या अन्य रिकॉर्ड भी उपयोगी हो सकते हैं।

लेकिन आपातकालीन उपचार के दौरान दस्तावेज इकट्ठा करने के प्रयास में सहायता में देरी न करें।

निजी चिकित्सा रिकॉर्ड या पहचान दस्तावेज किसी अनजान WhatsApp नंबर या असत्यापित वेबसाइट पर साझा न करें।

इनका उपयोग केवल अधिकृत संस्थाओं और आवश्यक आधिकारिक प्रक्रिया में करें।

2026 में PM-RAHAT योजना की प्रगति कितनी हुई?

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने अगस्त 2026 में योजना के कार्यान्वयन की जानकारी संसद में साझा की।

सरकारी विवरण के अनुसार 31 जुलाई 2026 तक 34 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 22,481 सड़क दुर्घटना पीड़ित योजना से लाभान्वित होने के रूप में दर्ज किए गए।

अस्पतालों द्वारा किए गए दावों में राज्य स्वास्थ्य एजेंसियों ने लगभग ₹12.59 करोड़ के दावे स्वीकृत किए थे।

इनमें से लगभग ₹10.56 करोड़ का भुगतान अस्पतालों को किया जा चुका था।

ये आँकड़े जुलाई 2026 तक की स्थिति बताते हैं, न कि आज तक की लगातार बदलती कुल संख्या।

इसलिए भविष्य में यदि नए सरकारी आँकड़े प्रकाशित होते हैं, तो लेख में संदर्भ तारीख के साथ उन्हें अपडेट करना उचित रहेगा।

अधिक जानकारी के लिए 12 अगस्त 2026 की आधिकारिक कार्यान्वयन रिपोर्ट पढ़ें।

PM-RAHAT योजना से जुड़ी ऑनलाइन धोखाधड़ी से कैसे बचें?

नई सरकारी योजनाओं के नाम पर फर्जी लिंक और धोखाधड़ी की संभावना रहती है।

यदि कोई व्यक्ति कहे कि ₹1.5 लाख पाने के लिए पहले ₹999 का रजिस्ट्रेशन शुल्क देना होगा, तो तुरंत सावधान हो जाएँ।

यह योजना नकद पुरस्कार बाँटने की प्रक्रिया नहीं है।

इसी तरह यदि कोई अनजान वेबसाइट बैंक OTP, UPI PIN या पासवर्ड माँगती है, तो ऐसी जानकारी कभी साझा न करें।

सरकारी योजना की पुष्टि आधिकारिक मंत्रालय, राज्य परिवहन विभाग और PIB की वेबसाइट से करें।

इंटरनेट पर मिलने वाली हर योजना की पोस्ट या वीडियो को आधिकारिक सूचना न मानें।

किसी संदिग्ध APK फाइल को इंस्टॉल करने या अज्ञात लिंक पर क्लिक करने से भी बचें।

सड़क दुर्घटना में सहायता के लिए आधिकारिक 112 सेवा का उपयोग करें, न कि किसी वायरल संदेश में दिए गए अनजान नंबर का।

राह-वीर या Good Samaritan कौन होता है?

Good Samaritan वह व्यक्ति होता है जो दुर्घटना में घायल की स्वेच्छा से सहायता करता है।

भारत में ऐसे मददगार व्यक्तियों के लिए कानूनी संरक्षण से संबंधित नियम भी बनाए गए हैं।

PM-RAHAT की आधिकारिक जानकारी में ऐसे व्यक्तियों के लिए राह-वीर शब्द का उपयोग किया गया है।

यदि कोई व्यक्ति दुर्घटना देखकर एम्बुलेंस बुलाता है या घायल को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में योगदान देता है, तो वह जीवनरक्षक भूमिका निभा सकता है।

हालाँकि उसे अपनी सुरक्षा, उपलब्ध प्रशिक्षण और प्रशासनिक निर्देशों का ध्यान रखना चाहिए।

घायल की मदद करते समय उसके निजी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर फैलाना उचित नहीं है।

मानवीय सहायता का उद्देश्य घायल को सुरक्षित चिकित्सा तक पहुँचाना होना चाहिए।

PM-RAHAT योजना के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. PM-RAHAT योजना कब शुरू हुई?

योजना का राष्ट्रीय शुभारंभ 13 फरवरी 2026 को किया गया। इससे संबंधित मूल कैशलेस उपचार व्यवस्था मई 2025 में अधिसूचित हुई थी।

2. योजना के अंतर्गत कितनी सहायता मिलती है?

पात्र पीड़ित के लिए ₹1.5 लाख तक के निर्धारित कैशलेस उपचार का प्रावधान है।

3. कितने दिनों तक इलाज मिलता है?

दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों की सीमा लागू है।

4. क्या पीड़ित के बैंक खाते में पैसे आते हैं?

नहीं। योजना का मुख्य लाभ निर्धारित अस्पताल में कैशलेस उपचार है, न कि सीधे बैंक खाते में राशि भेजना।

5. क्या आयुष्मान कार्ड जरूरी है?

PM-RAHAT की पात्रता अलग दुर्घटना-आधारित व्यवस्था पर निर्भर करती है। इसे केवल आयुष्मान कार्ड धारकों तक सीमित नहीं समझना चाहिए।

6. क्या बाइक दुर्घटना में लाभ मिल सकता है?

यदि दुर्घटना मोटर वाहन के उपयोग से संबंधित है और अन्य नियम पूरे होते हैं, तो पात्रता बन सकती है।

7. क्या हिट-एंड-रन में भी योजना लागू हो सकती है?

हाँ, सरकारी व्यवस्था में हिट-एंड-रन मामलों के वित्तपोषण का भी प्रावधान बताया गया है।

8. दुर्घटना के बाद कौन-से नंबर पर कॉल करें?

आपातकालीन सहायता के लिए 112 पर कॉल करें।

9. क्या सभी निजी अस्पताल शामिल हैं?

नहीं। योजना के अंतर्गत निर्धारित और संबंधित नियमों का पालन करने वाले अस्पताल महत्वपूर्ण हैं।

10. यदि अस्पताल मना करे तो क्या करें?

अस्पताल प्रशासन तथा जिला स्तर के शिकायत निवारण अधिकारी से संपर्क करें। आपातकालीन सहायता में देरी न करें।

11. क्या सात दिन के बाद भी सभी खर्च सरकार देगी?

सात दिन और ₹1.5 लाख की अधिकतम सीमा के बाहर उपचार पर अन्य नियम या भुगतान व्यवस्था लागू हो सकती है। इसे असीमित निःशुल्क इलाज न समझें।

12. क्या इस योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरना होता है?

यह सामान्य नकद लाभ वाली आवेदन योजना नहीं है। पात्र दुर्घटना मामलों में अस्पताल और संबंधित सरकारी प्रणालियों के माध्यम से प्रक्रिया संचालित होती है।

PM-RAHAT के आधिकारिक स्रोत कहाँ देखें?

सरकारी योजना की जानकारी लेते समय आधिकारिक वेबसाइटों को प्राथमिकता देना जरूरी है।

PM-RAHAT के मूल नियम और प्रक्रिया के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की PIB विज्ञप्ति देखें।

योजना के शुभारंभ तथा 112 से जुड़ी व्यवस्था के लिए 14 फरवरी 2026 की सरकारी घोषणा पढ़ सकते हैं।

योजना के व्यावहारिक दिशानिर्देशों और संबंधित दस्तावेजों के लिए उत्तराखंड परिवहन विभाग का आधिकारिक योजना पृष्ठ भी उपयोगी है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण से संबंधित जानकारी NHA की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।

ये सभी सरकारी संदर्भ हैं। योजना के नियमों में भविष्य में कोई बदलाव होने पर नवीनतम अधिसूचना को प्राथमिकता देनी चाहिए।

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जरूरी अस्वीकरण

यह लेख भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और अन्य आधिकारिक स्रोतों पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर शैक्षिक एवं जनहित उद्देश्य से तैयार किया गया है।

PM-RAHAT का लाभ संबंधित सरकारी नियमों, अस्पताल की पात्रता, दुर्घटना के सत्यापन, निर्धारित चिकित्सा पैकेज और लागू प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है।

₹1.5 लाख योजना की अधिकतम उपचार सीमा है, प्रत्येक व्यक्ति को मिलने वाली निश्चित नकद सहायता नहीं।

यह लेख चिकित्सा, कानूनी या व्यक्तिगत बीमा सलाह का विकल्प नहीं है। सड़क दुर्घटना की आपातस्थिति में तुरंत 112 से सहायता प्राप्त करें।

नियम, अस्पतालों की सूची और प्रशासनिक प्रक्रिया समय के साथ बदल सकती है। अंतिम पुष्टि संबंधित सरकारी विभाग या अधिकृत अस्पताल से करें।

अंत में जाते-जाते

सड़क दुर्घटना के बाद सबसे बड़ी चुनौती केवल इलाज का खर्च नहीं, बल्कि घायल को सही समय पर अस्पताल पहुँचाना भी है।

PM-RAHAT योजना का उद्देश्य इसी चुनौती को कम करना है।

योजना के तहत पात्र दुर्घटना पीड़ितों को अधिकतम सात दिनों की अवधि में ₹1.5 लाख तक के उपचार कवरेज का प्रावधान दिया गया है।

लेकिन इसकी वास्तविक उपयोगिता तभी बढ़ेगी, जब अधिक से अधिक लोगों को 112 आपातकालीन सहायता, निर्धारित अस्पताल और शिकायत की प्रक्रिया के बारे में जानकारी होगी।

यदि कभी सड़क पर दुर्घटना देखें, तो अपनी सुरक्षा का ध्यान रखते हुए सहायता बुलाने में देर न करें।

किसी घायल व्यक्ति को केवल इसलिए सहायता से वंचित नहीं होना चाहिए कि आसपास मौजूद लोगों को सरकारी व्यवस्था की जानकारी नहीं थी।

इसलिए इस लेख को अपने परिवार, मित्रों और वाहन चलाने वाले परिचितों तक पहुँचाएँ।

हो सकता है कि सही समय पर मिली यह जानकारी किसी जरूरतमंद के लिए महत्वपूर्ण साबित हो।

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