प्रयागराज के संगम क्षेत्र से भगवान हनुमान के भक्तों के लिए बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। बाढ़ और गंगा के बढ़े जलस्तर के कारण कई दिनों तक बंद रहा प्रसिद्ध श्री बड़े हनुमान जी मंदिर यानी लेटे हनुमान मंदिर अब एक बार फिर श्रद्धालुओं के लिए खुल गया है।
12 सितंबर 2026 को मंदिर के कपाट दोबारा खोले गए। इससे पहले गंगा का पानी मंदिर परिसर में प्रवेश कर गया था, जिसके कारण करीब 13 दिनों तक भक्तों के लिए दर्शन बंद रहे।
जलस्तर घटने के बाद मंदिर परिसर की साफ-सफाई और धुलाई की गई। इसके बाद भगवान हनुमान का विधि-विधान से अभिषेक, श्रृंगार और आरती की गई और फिर भक्तों को दर्शन की अनुमति दी गई।
मंदिर खुलते ही संगम क्षेत्र में एक बार फिर श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई देने लगी।
लेकिन यह सिर्फ मंदिर दोबारा खुलने की खबर नहीं है।
प्रयागराज का यह मंदिर भारत के सबसे अनोखे हनुमान मंदिरों में गिना जाता है, क्योंकि यहां भगवान हनुमान की प्रतिमा लेटे हुए स्वरूप में स्थापित है।
आइए विस्तार से जानते हैं:
- बड़े हनुमान मंदिर क्यों बंद हुआ था?
- मंदिर कितने दिन बंद रहा?
- कब फिर खुला?
- जलशयन क्या होता है?
- यहां भगवान हनुमान लेटे हुए क्यों हैं?
- मंदिर की प्रतिमा कितनी बड़ी है?
- मंदिर की धार्मिक मान्यता क्या है?
- और यदि आप प्रयागराज जा रहे हैं तो यहां कैसे पहुंचें?
बड़े हनुमान मंदिर के कपाट फिर खुले
प्रयागराज के संगम के पास स्थित लेटे हनुमान मंदिर के कपाट 12 सितंबर 2026 को श्रद्धालुओं के लिए दोबारा खोल दिए गए।
गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण मंदिर में पानी भर गया था।
30 अगस्त के आसपास गंगा का पानी मंदिर परिसर तक पहुंच गया और इसके बाद भक्तों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई।
करीब 13 दिनों तक श्रद्धालु मंदिर के बाहर से ही दर्शन और पूजा कर रहे थे।
जब गंगा का जलस्तर कम हुआ और मंदिर परिसर से पानी हटने लगा, तब सफाई का काम शुरू किया गया।
इसके बाद:
- मंदिर की धुलाई हुई
- परिसर से गाद और गंदगी हटाई गई
- भगवान हनुमान का अभिषेक किया गया
- पुष्पों से श्रृंगार हुआ
- विशेष पूजा की गई
- आरती हुई
और इसके बाद मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।
13 दिन बाद फिर लौटी भक्तों की रौनक
मंदिर के खुलने का इंतजार भक्त कई दिनों से कर रहे थे।
जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचने लगे।
मंदिर परिसर में:
- जय बजरंगबली
- जय श्रीराम
- हनुमान जी महाराज की जय
के जयकारे गूंजने लगे।
महंत बलवीर गिरि द्वारा विशेष आरती किए जाने की खबर भी सामने आई है। पूजा और आरती के बाद श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति दी गई।
बाढ़ के कारण कुछ दिनों तक शांत दिखाई देने वाला मंदिर परिसर एक बार फिर भक्ति और श्रद्धा से भर गया।
बड़े हनुमान मंदिर में पानी क्यों भर गया था?
अगस्त और सितंबर 2026 के दौरान प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हुई।
भारी बारिश और upstream क्षेत्रों से आने वाले पानी के कारण दोनों नदियों का जलस्तर बढ़ा।
संगम क्षेत्र नदियों के बेहद करीब होने के कारण इसका प्रभाव बड़े हनुमान मंदिर पर भी पड़ा।
24 अगस्त तक भी गंगा का पानी मंदिर के पास पहुंचने की खबरें सामने आने लगी थीं और बाद में जलस्तर बढ़ने के साथ पानी मंदिर परिसर में प्रवेश कर गया।
नदी का पानी बढ़ने पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए मंदिर में सामान्य दर्शन रोक दिए गए।
प्रशासन क्यों रहता है सतर्क?
प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर मानसून के दौरान अचानक बढ़ सकता है।
इसलिए:
- संगम क्षेत्र
- नदी किनारे की बस्तियां
- घाट
- मंदिर
- निचले इलाके
विशेष निगरानी में रहते हैं।
हाल के दिनों में गंगा और यमुना के जलस्तर में उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है और प्रशासन द्वारा स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
यही कारण है कि मंदिर के खुलने के बाद भी श्रद्धालुओं को यात्रा से पहले स्थानीय स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए।
जलशयन क्या होता है?
प्रयागराज के बड़े हनुमान मंदिर की सबसे अनोखी धार्मिक परंपराओं में से एक है जलशयन।
जब गंगा का पानी बढ़ते-बढ़ते मंदिर में प्रवेश करता है और भगवान हनुमान की लेटी हुई प्रतिमा तक पहुंच जाता है, तब भक्त इसे सामान्य बाढ़ की घटना के साथ-साथ एक धार्मिक परंपरा और आस्था के रूप में भी देखते हैं।
लोकमान्यता में इसे कहा जाता है कि:
मां गंगा स्वयं भगवान हनुमान को स्नान कराने आती हैं।
इस समय मंदिर में सामान्य दर्शन रोक दिए जाते हैं।
जब जलस्तर घट जाता है तो:
- मंदिर की सफाई
- धुलाई
- अभिषेक
- पूजा
- आरती
के बाद कपाट दोबारा खोले जाते हैं।
यही प्रक्रिया इस बार भी देखने को मिली।
बड़े हनुमान मंदिर कहां स्थित है?
श्री लेटे हुए हनुमान जी मंदिर प्रयागराज के प्रसिद्ध संगम क्षेत्र के पास स्थित है।
प्रयागराज जिला प्रशासन की आधिकारिक पर्यटन वेबसाइट के अनुसार यह मंदिर गंगा तट के पास दारागंज क्षेत्र में स्थित है।
इसे कई नामों से जाना जाता है:
- बड़े हनुमान जी
- लेटे हनुमान जी
- किले वाले हनुमान जी
- बांध वाले हनुमान जी
यह प्रयागराज आने वाले श्रद्धालुओं के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है।
यहां हनुमान जी लेटे हुए क्यों हैं?
यह मंदिर इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि यहां भगवान हनुमान की प्रतिमा खड़ी या बैठी हुई अवस्था में नहीं बल्कि लेटे हुए स्वरूप में है।
इस स्वरूप के पीछे कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं।
प्रयागराज जिला प्रशासन की आधिकारिक जानकारी में एक प्रमुख कथा का उल्लेख मिलता है।
मान्यता के अनुसार लंका विजय के बाद जब भगवान हनुमान लौट रहे थे तो यात्रा के दौरान उन्हें थकान महसूस हुई।
तब माता सीता के कहने पर उन्होंने संगम तट पर विश्राम किया।
इसी स्मृति से यहां लेटे हुए हनुमान जी की पूजा की परंपरा जुड़ी मानी जाती है।
प्रतिमा कितनी बड़ी है?
उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयागराज जिला प्रशासन की पर्यटन वेबसाइट के अनुसार मंदिर में स्थापित भगवान हनुमान की प्रतिमा लगभग 20 फीट लंबी मानी जाती है।
प्रतिमा दक्षिणाभिमुखी बताई जाती है।
यह भी बताया गया है कि प्रतिमा जमीन की सतह से करीब 6 से 7 फीट नीचे स्थित है।
यही unique structure मंदिर को भारत के अन्य हनुमान मंदिरों से अलग बनाता है।
प्रतिमा से जुड़ी धार्मिक मान्यता
स्थानीय और धार्मिक मान्यताओं में भगवान हनुमान के इस स्वरूप के साथ कई पौराणिक कथाएं भी जुड़ी हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार की tourism information के अनुसार:
- हनुमान जी के बाएं पैर के नीचे कामदा देवी
- दाएं पैर के नीचे अहिरावण
से जुड़ी मान्यता बताई जाती है।
प्रतिमा में राम और लक्ष्मण से जुड़ी छवियों का भी उल्लेख मिलता है।
इन कथाओं को धार्मिक और स्थानीय परंपराओं के रूप में समझना चाहिए।
मंदिर कितना पुराना है?
प्रयागराज जिला प्रशासन की आधिकारिक पर्यटन जानकारी में मंदिर को लगभग 600 से 700 वर्ष पुराना माना गया है।
इससे जुड़ी एक दूसरी कथा भी प्रचलित है।
कहा जाता है कि कन्नौज के एक राजा संतान की इच्छा रखते थे।
उनके गुरु ने उन्हें भगवान हनुमान की विशेष प्रतिमा बनवाने की सलाह दी।
प्रतिमा विंध्याचल क्षेत्र से लाई जा रही थी।
लेकिन यात्रा के दौरान नाव दुर्घटना का शिकार हो गई और प्रतिमा जल में डूब गई।
कई वर्षों बाद जब गंगा का जलस्तर घटा तो बाबा बालगिरी महाराज को यह प्रतिमा मिली।
इसके बाद इसी स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया गया।
यह विवरण धार्मिक एवं स्थानीय परंपरा का हिस्सा है और इसे उसी संदर्भ में पढ़ना चाहिए।
समर्थ गुरु रामदास से भी जुड़ती है परंपरा
सरकारी पर्यटन जानकारी में यह भी कहा गया है कि संत समर्थ गुरु रामदास ने यहां भगवान हनुमान की प्रतिमा स्थापित की थी।
समर्थ रामदास भगवान राम और हनुमान के महान भक्त माने जाते हैं।
उनकी परंपरा में हनुमान उपासना और शक्ति-साधना का विशेष महत्व रहा है।
मंदिर परिसर में और कौन-कौन से देवी-देवता हैं?
बड़े हनुमान मंदिर परिसर में केवल हनुमान जी ही नहीं बल्कि दूसरे देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।
सरकारी पर्यटन जानकारी के अनुसार यहां:
- भगवान शिव
- माता पार्वती
- गणेश जी
- भैरव
- दुर्गा
- काली
- नवग्रह
की प्रतिमाएं भी हैं।
पास में राम-जानकी मंदिर और हरित माधव मंदिर का भी उल्लेख मिलता है।
इसलिए संगम क्षेत्र में आने वाला श्रद्धालु एक ही यात्रा में कई धार्मिक स्थलों के दर्शन कर सकता है।
संगम और बड़े हनुमान मंदिर का संबंध
प्रयागराज को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र तीर्थ माना जाता है।
यहां:
गंगा + यमुना + अदृश्य सरस्वती
के संगम की मान्यता है।
यही कारण है कि इसे तीर्थराज प्रयाग कहा जाता है।
प्रयागराज जिला प्रशासन भी शहर को धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व वाला प्रमुख तीर्थस्थल बताता है।
संगम स्नान के बाद बहुत से श्रद्धालु बड़े हनुमान जी के दर्शन करना अपनी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।
कुंभ और महाकुंभ में मंदिर का महत्व
जब प्रयागराज में:
- माघ मेला
- कुंभ
- महाकुंभ
का आयोजन होता है तो संगम के साथ बड़े हनुमान मंदिर में भी भक्तों की संख्या बहुत बढ़ जाती है।
स्नान के बाद श्रद्धालु हनुमान जी के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचते हैं।
महाकुंभ 2025 के दौरान भी बड़े हनुमान मंदिर श्रद्धालुओं के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में शामिल रहा।
मंदिर खुलने के बाद क्या स्थिति है?
12 सितंबर 2026 को कपाट खुलने के बाद श्रद्धालुओं की आवाजाही दोबारा शुरू हो गई है।
लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि मानसून अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और प्रयागराज में नदी का जलस्तर बदल सकता है।
इसलिए यदि आप आने वाले दिनों में मंदिर जाने की योजना बना रहे हैं तो:
- स्थानीय मौसम देखें
- गंगा-यमुना जलस्तर की जानकारी लें
- प्रशासनिक advisory देखें
- भारी बारिश के दिन संगम क्षेत्र की स्थिति जांचें
और उसके बाद ही यात्रा करें।
मंदिर तक कैसे पहुंचें?
प्रयागराज जिला प्रशासन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार:
ट्रेन से
प्रयागराज जंक्शन से मंदिर की दूरी लगभग 6 किलोमीटर बताई गई है।
प्रयाग स्टेशन से करीब 5.4 किलोमीटर।
रामबाग स्टेशन से लगभग 4 किलोमीटर।
सड़क से
Civil Lines Bus Stand से दूरी लगभग 5 किलोमीटर बताई गई है।
हवाई मार्ग से
प्रयागराज Airport से भी शहर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।
सरकारी जानकारी में Bamrauli Airport की दूरी लगभग 17 किलोमीटर बताई गई है।
यदि आप प्रयागराज जा रहे हैं तो और कहां जा सकते हैं?
प्रयागराज धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है।
बड़े हनुमान मंदिर की यात्रा के साथ आप:
- त्रिवेणी संगम
- अक्षयवट
- पातालपुरी मंदिर
- प्रयागराज किला
- नागवासुकी मंदिर
- शंकर विमान मंडपम
- अलोपी देवी मंदिर
- मनकामेश्वर मंदिर
- आनंद भवन
- चंद्रशेखर आजाद पार्क
जैसे स्थलों को भी अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं।
श्रद्धालुओं के लिए सावधानियां
बाढ़ के तुरंत बाद मंदिर क्षेत्र में जाने वाले श्रद्धालुओं को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।
1. फिसलन से सावधान रहें
पानी हटने के बाद भी फर्श और रास्तों पर नमी हो सकती है।
2. गंगा किनारे ज्यादा अंदर न जाएं
नदी का प्रवाह सामान्य दिखाई देने के बावजूद तेज हो सकता है।
3. बच्चों और बुजुर्गों का ध्यान रखें
भीड़ वाले समय में हाथ पकड़कर चलें।
4. प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें
यदि किसी क्षेत्र को temporarily बंद किया गया है तो वहां जाने की कोशिश न करें।
5. मौसम देखकर जाएं
भारी बारिश की चेतावनी हो तो यात्रा postpone करना बेहतर हो सकता है।
जलशयन को लेकर धार्मिक आस्था
स्थानीय भक्तों में यह मान्यता बहुत प्रसिद्ध है कि गंगा का मंदिर में प्रवेश करना शुभ संकेत माना जाता है।
इसे भगवान हनुमान का गंगा स्नान भी कहा जाता है।
हालांकि practical और administrative दृष्टि से मंदिर में पानी प्रवेश करना flood situation का हिस्सा होता है और इस दौरान safety सबसे महत्वपूर्ण रहती है।
इसलिए धार्मिक मान्यता और वास्तविक flood safety—दोनों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
बड़े हनुमान मंदिर क्यों इतना प्रसिद्ध है?
इस मंदिर की लोकप्रियता के कई कारण हैं:
1. लेटी हुई विशाल प्रतिमा
20 फीट लंबा reclining form बहुत अनोखा है।
2. संगम के पास location
देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह naturally प्रमुख destination है।
3. जलशयन परंपरा
गंगा का मंदिर में प्रवेश करना धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
4. प्राचीन धार्मिक परंपरा
मंदिर को कई सौ वर्ष पुराना माना जाता है।
5. कुंभ से संबंध
कुंभ और महाकुंभ के दौरान यहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं।
बड़े हनुमान मंदिर के नाम इतने अलग क्यों हैं?
इस मंदिर को अलग-अलग भक्त अलग नामों से जानते हैं:
लेटे हनुमान जी
क्योंकि प्रतिमा reclining position में है।
बड़े हनुमान जी
प्रतिमा के विशाल स्वरूप के कारण।
किले वाले हनुमान जी
प्रयागराज किले के पास स्थित होने के कारण।
बांध वाले हनुमान जी
स्थानीय geography और बांध क्षेत्र से जुड़े नाम के कारण।
नाम अलग हैं लेकिन मंदिर वही प्रसिद्ध संगम वाला लेटे हनुमान मंदिर है।
यह खबर धार्मिक पर्यटन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
मंदिर का दोबारा खुलना केवल स्थानीय भक्तों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है।
प्रयागराज पूरे भारत से आने वाले धार्मिक पर्यटकों का केंद्र है।
मंदिर बंद रहने से:
- स्थानीय यात्राएं
- संगम दर्शन
- धार्मिक tour plans
प्रभावित हो सकते हैं।
अब मंदिर खुलने से धार्मिक गतिविधियों में फिर सामान्य स्थिति लौटने लगी है।
क्या अभी मंदिर जाना सुरक्षित है?
मंदिर फिलहाल श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है।
लेकिन safety एक dynamic situation है।
बारिश या नदी का जलस्तर बढ़ने पर व्यवस्था फिर बदल सकती है।
इसलिए यात्रा से पहले latest information जरूर verify करें।
प्रयागराज जिला प्रशासन की official website:
लेटे हनुमान मंदिर की official tourism information:
https://prayagraj.nic.in/hi/tourist-place/श्री-लेटे-हुए-हनुमान-जी-मन्
The Rising Irish पर धार्मिक सामग्री पढ़ें
भारत के प्रसिद्ध मंदिरों, धार्मिक परंपराओं, भगवान शिव, हनुमान जी, गणेश जी और दूसरे धार्मिक विषयों के लिए हमारा Dharmik Shorts Gyan section पढ़ें:
यहां हम मंदिरों, धार्मिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़ी जानकारी आसान हिंदी में प्रकाशित करते हैं।
Trending News
धार्मिक खबरों के साथ सरकारी योजनाएं, मौसम चेतावनी, banking alert, cyber fraud और अन्य useful verified updates पढ़ने के लिए:
Web Stories
धर्म, मंदिर, ज्योतिष और दूसरे विषयों पर visual stories देखने के लिए:
WhatsApp Channel से जुड़ें
धर्म, मंदिर, ज्योतिष, राशिफल, सरकारी योजनाओं और उपयोगी verified updates की जानकारी सीधे WhatsApp पर पाने के लिए हमारे channel को Follow करें।
The Rising Irish WhatsApp Channel
https://whatsapp.com/channel/0029Vb7NH7B6LwHsPk50IS2C
Channel को Follow करने के बाद notification on करें ताकि नई जानकारी समय पर मिल सके।
FAQ: प्रयागराज बड़े हनुमान मंदिर
प्रयागराज बड़े हनुमान मंदिर कब खुला?
मंदिर के कपाट 12 सितंबर 2026 को करीब 13 दिन बाद श्रद्धालुओं के लिए दोबारा खोले गए।
मंदिर बंद क्यों था?
गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण मंदिर परिसर में पानी प्रवेश कर गया था, इसलिए सुरक्षा के कारण सामान्य दर्शन बंद किए गए थे।
बड़े हनुमान मंदिर कहां है?
यह प्रयागराज के संगम क्षेत्र के पास दारागंज में गंगा तट के निकट स्थित है।
इसे लेटे हनुमान मंदिर क्यों कहते हैं?
यहां भगवान हनुमान की विशाल प्रतिमा लेटी हुई अवस्था में स्थापित है।
हनुमान जी की प्रतिमा कितनी लंबी है?
प्रयागराज जिला प्रशासन की official tourism information के अनुसार प्रतिमा करीब 20 फीट लंबी मानी जाती है।
जलशयन क्या है?
जब गंगा का पानी मंदिर में प्रवेश कर भगवान हनुमान की प्रतिमा तक पहुंचता है तो भक्त इसे धार्मिक परंपरा में जलशयन या गंगा स्नान से जोड़ते हैं।
क्या अभी मंदिर में दर्शन हो रहे हैं?
12 सितंबर 2026 से मंदिर श्रद्धालुओं के लिए फिर खोल दिया गया है। हालांकि यात्रा से पहले मौसम और river-level advisory verify करना बेहतर है।
मंदिर कितना पुराना है?
सरकारी पर्यटन जानकारी में इसे लगभग 600 से 700 वर्ष पुराना माना गया है।
Verified Sources
इस लेख में मंदिर दोबारा खुलने और बाढ़ की स्थिति की जानकारी verified current news reports के आधार पर ली गई है।
12 सितंबर 2026 को 13 दिन बाद मंदिर खोले जाने, साफ-सफाई, अभिषेक और आरती के बाद दर्शन शुरू होने की पुष्टि कई स्वतंत्र रिपोर्टों में की गई है।
मंदिर के इतिहास, location, प्रतिमा और धार्मिक मान्यताओं से संबंधित जानकारी के लिए प्रयागराज जिला प्रशासन की official tourism website को प्राथमिक source के रूप में इस्तेमाल किया गया है।
Official source:
https://prayagraj.nic.in/hi/tourist-place/श्री-लेटे-हुए-हनुमान-जी-मन्
Disclaimer
यह लेख धार्मिक, पर्यटन और समाचार संबंधी सामान्य जानकारी के लिए प्रकाशित किया गया है।
मंदिर के इतिहास और भगवान हनुमान की प्रतिमा से जुड़ी कई कथाएं धार्मिक एवं स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं।
बाढ़, नदी के जलस्तर और मंदिर की opening status बदल सकती है।
इसलिए यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन, मंदिर प्रबंधन या official government source से latest information verify करें।
धार्मिक मान्यताओं को historical या scientific fact के रूप में न समझें।
अंत में जाते-जाते
प्रयागराज के प्रसिद्ध श्री बड़े हनुमान जी मंदिर का 13 दिन बाद फिर खुलना भक्तों के लिए बड़ी राहत है।
गंगा का पानी बढ़ने के कारण मंदिर बंद करना पड़ा था, लेकिन जलस्तर कम होने के बाद मंदिर परिसर की सफाई की गई, भगवान हनुमान का अभिषेक और श्रृंगार हुआ और विशेष आरती के बाद कपाट दोबारा खोल दिए गए।
अब श्रद्धालु फिर से लेटे हुए बजरंगबली के दर्शन कर रहे हैं।
यह मंदिर केवल अपने अनोखे reclining Hanuman स्वरूप के कारण ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि गंगा के साथ जुड़ी इसकी जलशयन परंपरा भी इसे बेहद खास बनाती है।
फिर भी अभी मानसून का समय है।
इसलिए यदि आप प्रयागराज जाकर बड़े हनुमान जी के दर्शन की योजना बना रहे हैं तो यात्रा से पहले मौसम, नदी का जलस्तर और स्थानीय प्रशासन की latest advisory जरूर check करें।
आस्था अपनी जगह है और सुरक्षा अपनी।
जय बजरंगबली। जय श्रीराम।
