भारत का इकलौता ऐसा मंदिर?

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देवघर का बाबा बैद्यनाथ धाम सिर्फ ज्योतिर्लिंग ही नहीं, बल्कि शक्ति पीठ से भी जुड़ा माना जाता है। यही बात इसे भारत के सबसे अनोखे शिव धामों में शामिल करती है।

रावण की एक भूल और बना बैद्यनाथ धाम!

मान्यता है कि रावण भगवान शिव को लंका ले जाना चाहता था। लेकिन रास्ते में शिवलिंग धरती पर स्थापित हो गया और फिर वहीं स्थिर हो गया।

इस मंदिर में छिपे हैं 2 रहस्य

बैद्यनाथ मंदिर का पंचशूल सामान्य त्रिशूल से अलग माना जाता है। इसके साथ ही चंद्रकांता मणि से जुड़ी एक प्राचीन मान्यता भी इस मंदिर को रहस्यमय बनाती है।

105 KM की आस्था यात्रा!

श्रावण महीने में लाखों कांवड़िए सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर पैदल देवघर पहुंचते हैं। यह यात्रा लगभग 105 किलोमीटर लंबी होती है।

भगवान का मुकुट जेल से क्यों आता है?

एक अनोखी परंपरा के अनुसार बाबा बैद्यनाथ के श्रृंगार के लिए मुकुट देवघर जेल में तैयार किया जाता है। यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही बताई जाती है।

देवघर या परली — असली बैद्यनाथ कौन?

बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के स्थान को लेकर अलग-अलग धार्मिक परंपराएँ मिलती हैं। देवघर के पक्ष में शिव पुराण की व्याख्या, शक्ति पीठ परंपरा और कांवड़ यात्रा को प्रमुख आधार माना जाता है।

महादेव काल के भी काल हैं!

क्या आपने कभी बाबा बैद्यनाथ धाम के दर्शन किए हैं? कमेंट में लिखें — हर हर महादेव और ऐसे ही मंदिरों के रहस्य जानने के लिए हमें फॉलो करें।