जन्म से लेकर मृत्यु तक…
हिमाचल का बाबा भूतनाथ मंदिर ऐसी परंपराओं से जुड़ा है, जो जीवन के हर संस्कार में भगवान शिव की उपस्थिति का एहसास कराती हैं।
कैसे हुई मंदिर की स्थापना?
लोकमान्यता के अनुसार राजा अजबर सेन को भगवान शिव का स्वप्न आया, जिसके बाद मंडी में बाबा भूतनाथ मंदिर की स्थापना हुई।
सदियों पुरानी शिखर शैली
मंदिर की प्राचीन वास्तुकला, नक्काशीदार स्तंभ और पवित्र मंडप इसकी ऐतिहासिक भव्यता को आज भी जीवित रखते हैं।
मंडी का शिव से गहरा नाता
मंडी में अनेक प्राचीन शिव मंदिर होने के कारण इसे ‘छोटी काशी’ भी कहा जाता है। बाबा भूतनाथ यहां की आस्था का प्रमुख केंद्र हैं।
हर संस्कार में बाबा भूतनाथ
स्थानीय परंपराओं में जन्म के बाद दर्शन से लेकर अंतिम संस्कार तक बाबा भूतनाथ का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
मक्खन से बनता है शिव का दिव्य स्वरूप
महाशिवरात्रि से पहले शिवलिंग पर मक्खन का विशेष लेप चढ़ाकर अद्भुत श्रृंगार किया जाता है, जिसे देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
देवताओं का अनोखा संगम
मंडी शिवरात्रि के दौरान आसपास के क्षेत्रों से अनेक देवी-देवताओं की पालकियां यहां पहुंचती हैं और पूरा शहर शिवमय हो जाता है।
क्या आप बाबा भूतनाथ के दर्शन करना चाहेंगे?
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