1000 साल पुराना रहस्य!
भुवनेश्वर का लिंगराज मंदिर आज भी अपनी अद्भुत वास्तुकला से हैरान करता है।
देवों की भूमि का हृदय
11वीं सदी का यह मंदिर कलिंग शैली का शानदार उदाहरण माना जाता है।
बिना आधुनिक सीमेंट के निर्माण!
पत्थरों की मजबूत जोड़ाई आज भी इसकी प्राचीन इंजीनियरिंग दिखाती है।
4 अद्भुत हिस्से
भोग मंडप, नाट्य मंडप, जगमोहन और विशाल गर्भगृह इसकी खास संरचना हैं।
शिव और विष्णु का संगम
यहाँ भगवान को हरिहर स्वरूप से भी जोड़ा जाता है।
स्वयंभू शिवलिंग की मान्यता
मान्यता है कि यहाँ का शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ था।
180 फीट ऊँचे शिखर पर महादीप
महाशिवरात्रि पर शिखर पर महादीप जलाने की विशेष परंपरा है।
पवित्र बिंदुसागर
मंदिर के पास स्थित यह सरोवर धार्मिक परंपराओं में बेहद महत्वपूर्ण है।
150+ छोटे मंदिर
पूरा परिसर एक विशाल प्राचीन मंदिर नगरी जैसा दिखाई देता है।
आस्था, इतिहास और वास्तुकला का संगम
लिंगराज मंदिर आज भी भारत की अद्भुत धरोहरों में गिना जाता है।
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