मुरुदेश्वर: जहां समुद्र करता है शिव का अभिषेक

अरब सागर के किनारे स्थित यह धाम अपनी विशाल शिव प्रतिमा और अद्भुत समुद्री दृश्य के लिए प्रसिद्ध है।

रावण, गणेश और आत्मलिंग की कथा

मान्यता है कि रावण आत्मलिंग लेकर जा रहा था, लेकिन भगवान गणेश की लीला से वह गोकर्ण क्षेत्र में स्थापित हो गया। इसी कथा से मुरुदेश्वर का संबंध जुड़ता है।

आसमान छूती शिव प्रतिमा

मुरुदेश्वर की विशाल शिव प्रतिमा लगभग 123 फीट ऊंची है। पास ही भव्य राजगोपुरम इस स्थान की सुंदरता और बढ़ाता है।

यहां सिर्फ दर्शन ही नहीं, अनुभव भी हैं

भू-कैलाश गुफा, नेत्राणी द्वीप पर स्कूबा डाइविंग और समुद्र किनारे सूर्यास्त—मुरुदेश्वर आस्था और रोमांच दोनों का संगम है।

भारत की खूबसूरत Coastal Drive

मुरुदेश्वर से होन्नावर और गोकर्ण तक का तटीय रास्ता समुद्र, हरियाली और शानदार नजारों से भरा हुआ है।

मुरुदेश्वर कब और कैसे जाएं?

अक्टूबर से फरवरी का समय सबसे अच्छा माना जाता है। नजदीकी एयरपोर्ट मंगलुरु है और मुरुदेश्वर रेलवे स्टेशन भी आसानी से पहुंच योग्य है।

क्या महादेव आपको बुला रहे हैं?

अगर आप भी कभी मुरुदेश्वर जाना चाहते हैं, तो इस जगह को अपनी यात्रा सूची में जरूर शामिल करें। जय महादेव।