काशी का बढ़ता हुआ शिवलिंग!

वाराणसी का तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर अपनी एक अद्भुत मान्यता के लिए प्रसिद्ध है—यहां का शिवलिंग आज भी बढ़ता हुआ माना जाता है।

ढाई हजार साल पुराना रहस्य

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह स्वयंभू शिवलिंग बेहद प्राचीन है और हर मकर संक्रांति पर इसके आकार में तिल के बराबर वृद्धि होती है।

महर्षि विभांड की तपस्या

कथा है कि महर्षि विभांड ने यहां कठोर तपस्या की। प्रसन्न होकर भगवान शिव शिवलिंग स्वरूप में प्रकट हुए।

जब शिवलिंग की हुई परीक्षा

लोककथाओं के अनुसार मुगल और ब्रिटिश काल में भी शिवलिंग की वृद्धि को परखने के प्रयास किए गए, लेकिन यह रहस्य बना रहा।

उत्तर और दक्षिण का संगम

यह मंदिर उत्तर भारतीय शैव परंपरा और दक्षिण भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं का अनोखा मेल माना जाता है।

अनोखी आरती परंपराएं

यहां नारियल की जटा से स्नान, डमरू वादन और विशेष पारंपरिक विधियों से भगवान शिव की आरती की जाती है।

मनोकामना की ‘शिवकोटि’

भक्त अपनी मनोकामना लिखकर विशेष पात्र में डालते हैं और उसकी परिक्रमा करते हैं। इसे श्रद्धा से जुड़ी प्राचीन परंपरा माना जाता है।

सावन और महाशिवरात्रि का महत्व

सावन, मकर संक्रांति और महाशिवरात्रि पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

कहां है तिलभांडेश्वर मंदिर?

यह प्राचीन शिव मंदिर वाराणसी के पांडेय हवेली क्षेत्र में स्थित है और काशी विश्वनाथ क्षेत्र से भी ज्यादा दूर नहीं है।

क्या आप इस रहस्य के दर्शन करना चाहेंगे?

क्या आपने कभी तिलभांडेश्वर महादेव के दर्शन किए हैं? कमेंट में “हर हर महादेव” जरूर लिखें।      🙏