गुरु प्रदोष व्रत 2026: सितंबर 2026 का अगला प्रदोष व्रत गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। गुरुवार के दिन पड़ने के कारण इसे गुरु प्रदोष व्रत या बृहस्पति प्रदोष कहा जाता है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!लेकिन इस बार सबसे जरूरी सवाल केवल यह नहीं है कि प्रदोष व्रत कब है।
असल सवाल है—
24 सितंबर को शिव पूजा किस समय करें?
त्रयोदशी 23 सितंबर की रात से शुरू हो रही है तो व्रत 23 को क्यों नहीं?
सुबह शिवलिंग पर जल चढ़ाना है या शाम प्रदोष काल में पूजा करनी है?
अगर पूरा व्रत नहीं रख सकते तो क्या करें?
और शहर बदलने पर पूजा का समय कितना बदल सकता है?
इसीलिए इस लेख को सामान्य “प्रदोष व्रत कथा और पूजा विधि” की तरह नहीं, बल्कि 24 सितंबर के पूरे दिन की practical पूजा guide के रूप में तैयार किया गया है।
नई दिल्ली के लिए Drik Panchang के अनुसार 24 सितंबर 2026 को गुरु प्रदोष पूजा का समय लगभग शाम 6:16 बजे से रात 8:39 बजे तक है। त्रयोदशी तिथि 23 सितंबर को रात 10:50 बजे शुरू होकर 24 सितंबर को रात 11:18 बजे समाप्त होगी।
महत्वपूर्ण: प्रदोष काल सूर्यास्त पर आधारित होता है, इसलिए आपके शहर में पूजा का exact समय दिल्ली से कुछ मिनट अलग हो सकता है। अपने शहर का स्थानीय पंचांग जरूर देखें।
गुरु प्रदोष व्रत 2026 एक नजर में
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| व्रत | गुरु प्रदोष व्रत |
| तारीख | 24 सितंबर 2026 |
| दिन | गुरुवार |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
| तिथि | त्रयोदशी |
| मास | भाद्रपद |
| त्रयोदशी प्रारंभ | 23 सितंबर, रात 10:50 बजे |
| त्रयोदशी समाप्त | 24 सितंबर, रात 11:18 बजे |
| नई दिल्ली प्रदोष पूजा समय | शाम 6:16 से रात 8:39 बजे |
| मुख्य आराध्य | भगवान शिव और माता पार्वती |
| व्रत का नाम गुरुवार होने पर | गुरु प्रदोष / बृहस्पति प्रदोष |
दिल्ली के लिए यह समय Drik Panchang की गणना पर आधारित है।
सबसे पहले समझें: प्रदोष व्रत क्या है?
हिंदू पंचांग में प्रत्येक चंद्र मास की कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है।
यानी सामान्य रूप से महीने में दो प्रदोष आते हैं।
लेकिन केवल त्रयोदशी तिथि होना ही पर्याप्त नहीं माना जाता।
प्रदोष व्रत का निर्धारण उस दिन से किया जाता है जब त्रयोदशी तिथि सूर्यास्त के बाद के प्रदोष काल को स्पर्श करती है।
Drik Panchang भी प्रदोष व्रत के निर्धारण में सूर्यास्त के बाद त्रयोदशी और प्रदोष काल के overlap को आधार बताता है।
यही कारण है कि इस बार त्रयोदशी 23 सितंबर की रात शुरू होने के बावजूद प्रदोष व्रत 24 सितंबर को रखा जाएगा।
गुरु प्रदोष क्यों कहा जाता है?
प्रदोष व्रत जिस वार को पड़ता है, उसी के अनुसार उसका विशेष नाम भी प्रचलित है।
जैसे:
- सोमवार — सोम प्रदोष
- मंगलवार — भौम प्रदोष
- शनिवार — शनि प्रदोष
- रविवार — रवि प्रदोष
- गुरुवार — गुरु प्रदोष
24 सितंबर 2026 को गुरुवार है, इसलिए यह गुरु प्रदोष व्रत है।
धार्मिक परंपरा में गुरुवार को गुरु, ज्ञान, धर्म और सद्बुद्धि से जोड़ा जाता है, जबकि प्रदोष भगवान शिव की उपासना का समय माना जाता है।
इसलिए गुरु प्रदोष को श्रद्धालु शिव भक्ति के साथ ज्ञान, विवेक और धर्मपूर्ण जीवन की प्रार्थना से भी जोड़ते हैं।
इसे किसी निश्चित भौतिक परिणाम की guarantee के रूप में नहीं देखना चाहिए।
24 सितंबर 2026 को प्रदोष पूजा का सही समय क्या है?
नई दिल्ली के लिए प्रदोष पूजा मुहूर्त:
शाम 6:16 बजे से रात 8:39 बजे तक
कुल अवधि लगभग:
2 घंटे 23 मिनट
त्रयोदशी तिथि:
प्रारंभ: 23 सितंबर रात 10:50 बजे
समाप्त: 24 सितंबर रात 11:18 बजे
लेकिन यहां एक बहुत जरूरी बात है।
क्या पूरे भारत में यही समय रहेगा?
नहीं।
प्रदोष काल सूर्यास्त से जुड़ा होता है।
सूर्यास्त दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, लखनऊ, पटना, जयपुर, भोपाल या किसी दूसरे शहर में एक ही समय पर नहीं होता।
उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश के अलग-अलग स्थानों में भी कुछ मिनट का अंतर दिखाई देता है।
Drik Panchang पर Ghaziabad के लिए 24 सितंबर का प्रदोष काल लगभग 6:15 PM से 8:38 PM है, जबकि Aligarh के लिए लगभग 6:12 PM से 8:35 PM बताया गया है।
इसलिए अपने शहर के लिए local Panchang timing check करें।
24 सितंबर का सबसे अच्छा Practical Puja Plan
अगर आप इस दिन व्रत रखने वाले हैं तो पूरा दिन इस तरह organize कर सकते हैं।
सुबह 5:30–7:30 बजे: स्नान और संकल्प
सुबह उठकर स्नान करें।
साफ और सरल वस्त्र पहनें।
भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें।
यदि व्रत रख रहे हैं तो मन में संकल्प लें कि आप श्रद्धा, संयम और सकारात्मक भाव के साथ दिन बिताएंगे।
बहुत जटिल संस्कृत संकल्प न आता हो तो सरल हिंदी में भी भाव व्यक्त कर सकते हैं।
उदाहरण:
“हे महादेव, आज गुरु प्रदोष के अवसर पर मैं श्रद्धापूर्वक आपकी उपासना करता/करती हूं। मुझे सद्बुद्धि, धैर्य और धर्म के मार्ग पर चलने की शक्ति दें।”
इसे शास्त्रीय मंत्र न मानें—यह केवल सरल भाव-प्रार्थना है।
सुबह शिवलिंग पर जल चढ़ाएं या शाम को?
यह बहुत common सवाल है।
आप सुबह सामान्य शिव पूजा कर सकते हैं।
शिवलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित करें।
लेकिन प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा शाम के प्रदोष काल में करना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसलिए practical तरीका यह है:
सुबह
- स्नान
- शिवलिंग पर जल
- बेलपत्र
- धूप-दीप
- ॐ नमः शिवाय जप
शाम
- प्रदोष काल में विशेष शिव पूजा
- दीपक
- शिव-पार्वती ध्यान
- मंत्र जप
- आरती
अगर आपके पास समय कम हो तो शाम की पूजा को प्राथमिकता दें।
गुरु प्रदोष व्रत की पूजा सामग्री
बहुत ज्यादा पूजा सामग्री जुटाना जरूरी नहीं है।
सरल पूजा के लिए:
- स्वच्छ जल
- गंगाजल, उपलब्ध हो तो
- बेलपत्र
- पुष्प
- चंदन
- अक्षत
- धूप
- दीपक
- फल
- नैवेद्य
- रुद्राक्ष माला, यदि हो
- शिव-पार्वती की तस्वीर या शिवलिंग
काफी है।
क्या दूध चढ़ाना जरूरी है?
नहीं।
भगवान शिव की पूजा में जलाभिषेक सबसे सरल और व्यापक परंपरा है।
यदि आपकी पारिवारिक परंपरा में दूध, दही, शहद आदि से अभिषेक किया जाता है तो कर सकते हैं, लेकिन इसे अनिवार्य न समझें।
जल की बर्बादी से बचें और पूजा को प्रदर्शन में न बदलें।
गुरु प्रदोष की Step-by-Step पूजा विधि
अब मुख्य पूजा विधि समझते हैं।
Step 1: पूजा स्थान साफ करें
सूर्यास्त से पहले पूजा स्थान साफ कर लें।
जरूरी सामग्री पहले ही तैयार रखें।
इससे प्रदोष काल शुरू होने के बाद आपको बार-बार उठना नहीं पड़ेगा।
Step 2: हाथ-पैर धोकर बैठें
अगर शाम को दोबारा स्नान संभव है तो स्नान कर सकते हैं।
अन्यथा हाथ-पैर धोकर साफ वस्त्र पहनना practical विकल्प है।
Step 3: दीपक जलाएं
पूजा स्थान पर घी या तेल का दीपक जलाएं।
दीपक को सुरक्षित स्थान पर रखें।
Step 4: गणेश स्मरण करें
पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण से कर सकते हैं।
यह हिंदू पूजा परंपरा में सामान्य रूप से प्रचलित क्रम है।
Step 5: भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें
शिवलिंग या शिव-पार्वती के स्वरूप के सामने बैठकर ध्यान करें।
मन शांत रखें।
Step 6: शिवलिंग पर जल अर्पित करें
धीरे-धीरे स्वच्छ जल अर्पित करें।
यदि गंगाजल है तो सामान्य जल में थोड़ा मिला सकते हैं।
Step 7: बेलपत्र अर्पित करें
साफ और सही बेलपत्र श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।
बेलपत्र उपलब्ध न हो तो पूजा अधूरी नहीं मानी जानी चाहिए।
श्रद्धा अधिक महत्वपूर्ण है।
Step 8: पुष्प और चंदन अर्पित करें
अपनी परंपरा के अनुसार फूल और चंदन अर्पित करें।
कौन-सा मंत्र जपें?
सबसे सरल और व्यापक शिव मंत्र है:
ॐ नमः शिवाय
आप 11, 21, 51 या 108 बार अपनी क्षमता के अनुसार जप कर सकते हैं।
संख्या से अधिक एकाग्रता महत्वपूर्ण है।
यदि महामृत्युंजय मंत्र का सही उच्चारण जानते हैं तो उसका जप भी कर सकते हैं।
लेकिन गलत उच्चारण के डर से पूजा छोड़ने की जरूरत नहीं है।
सरल “ॐ नमः शिवाय” पर्याप्त devotional practice है।
शिव आरती कब करें?
प्रदोष काल में पूजा के अंतिम चरण में आरती कर सकते हैं।
नई दिल्ली के हिसाब से 24 सितंबर को मुख्य प्रदोष window शाम 6:16 बजे से 8:39 बजे के बीच है।
इस अवधि में अपनी सुविधा के अनुसार पूजा और आरती करें।
पूजा को ठीक 6:16 पर शुरू करना अनिवार्य नहीं है।
मुख्य बात यह है कि प्रदोष काल के भीतर पूजा हो।
15 मिनट की Quick Guru Pradosh Puja
हर व्यक्ति के पास लंबी पूजा का समय नहीं होता।
अगर नौकरी, दुकान, यात्रा या अन्य जिम्मेदारियों के कारण समय कम हो तो यह सरल पूजा करें:
- हाथ-पैर धोएं।
- दीपक जलाएं।
- भगवान शिव का ध्यान करें।
- शिवलिंग पर जल अर्पित करें।
- बेलपत्र अर्पित करें।
- 21 बार “ॐ नमः शिवाय” जपें।
- परिवार और सद्बुद्धि की प्रार्थना करें।
- आरती करें।
- प्रसाद ग्रहण करें।
पूजा की लंबाई से अधिक भाव महत्वपूर्ण है।
क्या गुरु प्रदोष का निर्जला व्रत जरूरी है?
नहीं।
व्रत रखने की विधि परिवार, क्षेत्र, परंपरा और व्यक्ति की क्षमता के अनुसार अलग हो सकती है।
कुछ लोग:
- निर्जल व्रत
- फलाहार
- दूध-फल
- एक समय भोजन
- केवल सात्विक भोजन
जैसे नियम अपनाते हैं।
यदि स्वास्थ्य अनुमति नहीं देता तो कठोर उपवास करना जरूरी नहीं है।
बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों को अपने स्वास्थ्य की जरूरत को प्राथमिकता देनी चाहिए।
धार्मिक व्रत स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं है।
क्या व्रत न रखने वाला व्यक्ति प्रदोष पूजा कर सकता है?
हां।
प्रदोष पूजा केवल व्रत रखने वालों तक सीमित नहीं है।
यदि आप उपवास नहीं रख सकते तो भी:
- शिव मंदिर जाएं
- जल अर्पित करें
- ॐ नमः शिवाय जपें
- दीपक जलाएं
- जरूरतमंद की मदद करें
- शांत मन से प्रार्थना करें
यह सब कर सकते हैं।
गुरु प्रदोष पर क्या खाएं?
जो लोग फलाहार करते हैं वे अपनी परंपरा के अनुसार:
- फल
- दूध
- दही
- मखाना
- साबूदाना
- सिंघाड़ा
- कुट्टू
- आलू
- मूंगफली
- सेंधा नमक
का उपयोग कर सकते हैं।
लेकिन सभी परिवारों में व्रत के नियम समान नहीं होते।
अपने घर की परंपरा को प्राथमिकता दें।
क्या नमक खा सकते हैं?
यह आपके व्रत के प्रकार पर निर्भर करता है।
सामान्य फलाहारी व्रत में कई लोग सेंधा नमक का प्रयोग करते हैं।
कुछ लोग बिना नमक के व्रत रखते हैं।
इसका कोई ऐसा universal rule नहीं है जो हर परिवार और संप्रदाय पर समान रूप से लागू हो।
गुरु प्रदोष पर क्या न करें?
यह section बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इंटरनेट पर अक्सर प्रदोष को लेकर डर पैदा करने वाली बातें लिख दी जाती हैं।
1. पूजा के समय जल्दीबाजी न करें
पांच मिनट की शांत पूजा आधे घंटे की जल्दबाजी वाली पूजा से बेहतर हो सकती है।
2. दिखावे के लिए सामग्री न खरीदें
महंगी पूजा सामग्री आवश्यक नहीं है।
3. भोजन बर्बाद न करें
प्रसाद उतना ही बनाएं जितना उपयोग हो सके।
4. व्रत के कारण स्वास्थ्य खराब न करें
कमजोरी, चक्कर या medical condition हो तो भोजन/दवा लें।
5. किसी धार्मिक दावे को guarantee न मानें
“यह उपाय करते ही कर्ज खत्म होगा” या “इतने दिन में नौकरी मिल जाएगी” जैसे निश्चित दावों से बचें।
धार्मिक पूजा श्रद्धा का विषय है, परिणाम की commercial guarantee नहीं।
गुरु प्रदोष और गुरुवार का क्या संबंध है?
गुरुवार भारतीय धार्मिक परंपरा में गुरु या बृहस्पति से जुड़ा दिन माना जाता है।
इसी वजह से गुरुवार को पड़ने वाला प्रदोष “गुरु प्रदोष” कहलाता है।
कई धार्मिक परंपराएं गुरु प्रदोष को:
- ज्ञान
- सद्बुद्धि
- धर्म
- शिक्षा
- गुरु सम्मान
- आध्यात्मिक विकास
से जोड़ती हैं।
लेकिन यह धार्मिक मान्यता है, वैज्ञानिक रूप से सिद्ध causal claim नहीं।
विद्यार्थियों के लिए गुरु प्रदोष पर क्या करें?
अगर विद्यार्थी हैं तो पूजा को परीक्षा में guaranteed success का उपाय न बनाएं।
इसके बजाय इस दिन:
- पढ़ाई का schedule बनाएं
- गुरुजनों का सम्मान करें
- distractions कम करें
- 5 मिनट ध्यान करें
- भगवान शिव से एकाग्रता की प्रार्थना करें
धार्मिक भाव और practical मेहनत साथ-साथ चलें।
नौकरी या व्यवसाय करने वाले क्या करें?
अगर प्रदोष काल office time में पड़ रहा हो तो परेशान न हों।
नई दिल्ली में यह पूजा window शाम 6:16 से रात 8:39 बजे तक है, इसलिए बहुत से लोग काम के बाद पूजा कर सकेंगे।
अगर commute लंबा है तो:
- घर पहुंचकर सरल पूजा करें
- पास के शिव मंदिर जाएं
- यात्रा में मन ही मन शिव नाम जपें
- घर पर दीपक और जल अर्पण करें
भक्ति को practical जीवन के साथ संतुलित करना बेहतर है।
गुरु प्रदोष के दिन शिव मंदिर कब जाएं?
सुबह सामान्य दर्शन के लिए जा सकते हैं।
लेकिन प्रदोष का मुख्य धार्मिक महत्व सूर्यास्त के आसपास की अवधि से जुड़ा है।
इसलिए संभव हो तो शाम के प्रदोष काल में शिव मंदिर जाएं।
भीड़ अधिक होने की संभावना हो तो पहले पहुंचें।
मंदिर में:
- धक्का-मुक्की न करें
- लंबी पूजा के कारण अन्य भक्तों का रास्ता न रोकें
- परिसर साफ रखें
- प्लास्टिक या पूजा सामग्री इधर-उधर न फेंकें
क्या शिवलिंग पर हल्दी चढ़ानी चाहिए?
भगवान शिव की पूजा में क्षेत्रीय और संप्रदायगत परंपराएं अलग-अलग होती हैं।
जो सामग्री आपके परिवार या मंदिर की स्थापित परंपरा में मान्य हो, वही अर्पित करना बेहतर है।
इंटरनेट की हर “शिवलिंग पर यह चढ़ाएं/यह न चढ़ाएं” list को सार्वभौमिक शास्त्रीय नियम न मानें।
स्थानीय मंदिर के पुजारी या अपनी पारिवारिक परंपरा को प्राथमिकता दें।
प्रदोष पर नंदी के दर्शन क्यों किए जाते हैं?
शिव मंदिरों में नंदी भगवान शिव के वाहन और परम भक्त के रूप में स्थापित होते हैं।
कई मंदिर परंपराओं में भक्त पहले नंदी को प्रणाम करते हैं और फिर शिवलिंग के दर्शन करते हैं।
नंदी और शिव की पूजा से जुड़ी अलग-अलग लोक और मंदिर परंपराएं मिलती हैं।
इन्हें श्रद्धा के साथ अपनाएं, लेकिन किसी निश्चित worldly result की guarantee न समझें।
पितृ पक्ष से पहले गुरु प्रदोष का महत्व
2026 में पितृ पक्ष 26 सितंबर के आसपास शुरू होने जा रहा है।
गुरु प्रदोष 24 सितंबर को है, यानी पितृ पक्ष शुरू होने से ठीक पहले।
इससे कई भक्तों के मन में सवाल आ सकता है कि पितृ पक्ष के आसपास शिव पूजा कैसे करें।
हमने इस विषय पर अलग से विस्तृत guide तैयार की है:
पितृ पक्ष में शिव पूजा कैसे करें? क्या करें और क्या न करें
इसमें स्पष्ट किया गया है कि सामान्य शिव पूजा और पितृ-कर्म दोनों का अपना अलग धार्मिक स्थान है।
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24 सितंबर गुरु प्रदोष: घंटे के हिसाब से पूरा दिन कैसे रखें?
अब उन readers के लिए practical schedule जो चाहते हैं कि दिन व्यवस्थित रहे।
सुबह 6 बजे के आसपास
स्नान और सामान्य पूजा।
सुबह 7–9 बजे
नियमित काम, बच्चों को स्कूल, office preparation आदि।
व्रत हो तो पर्याप्त पानी/स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
दोपहर
शिव मंत्र का मानसिक जप कर सकते हैं।
पूरे दिन पूजा के नाम पर जरूरी जिम्मेदारियां रोकने की जरूरत नहीं है।
शाम 5:30 बजे
पूजा सामग्री तैयार करें।
शाम 6:16 बजे के बाद
नई दिल्ली के reference से प्रदोष पूजा शुरू की जा सकती है।
शाम 7–8 बजे
अभिषेक, मंत्र, आरती।
रात 8:39 बजे तक
प्रदोष पूजा window रहती है।
इसके बाद अपनी पारिवारिक व्रत परंपरा के अनुसार प्रसाद या भोजन ग्रहण करें।
आपके शहर का प्रदोष समय कैसे पता करें?
सबसे आसान तरीका है:
- भरोसेमंद Panchang website खोलें।
- Location में अपना city डालें।
- 24 September 2026 चुनें।
- Guru Pradosh या Pradosham timing देखें।
- sunset-based puja time note करें।
नई दिल्ली का समय दूसरे शहर पर copy न करें।
आप Drik Panchang की Pradosh Dates पर location बदलकर समय देख सकते हैं।
गुरु प्रदोष में दान क्या करें?
दान अपनी क्षमता और जरूरतमंद व्यक्ति की वास्तविक आवश्यकता देखकर करें।
आप:
- भोजन
- फल
- कपड़े
- पढ़ाई की सामग्री
- जरूरतमंद परिवार की सहायता
कर सकते हैं।
दान को ग्रह या भगवान को “रिश्वत” की तरह न देखें।
दान का सबसे सार्थक अर्थ किसी जरूरतमंद की वास्तविक सहायता करना है।
क्या प्रदोष पर मंदिर जाना जरूरी है?
नहीं।
घर पर भी पूजा की जा सकती है।
अगर पास में मंदिर नहीं है, स्वास्थ्य ठीक नहीं है या बाहर जाना संभव नहीं है तो घर में शिव-पार्वती की तस्वीर या शिवलिंग के सामने पूजा करें।
भक्ति स्थान पर निर्भर नहीं करती।
अगर बेलपत्र न मिले तो?
पूजा रोकने की जरूरत नहीं।
जल, फूल और मंत्र से भी श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है।
पूजा सामग्री साधन है, पूजा का उद्देश्य नहीं।
क्या महिलाएं गुरु प्रदोष व्रत रख सकती हैं?
सामान्य रूप से महिलाएं और पुरुष दोनों प्रदोष व्रत रखते हैं।
लेकिन स्वास्थ्य, pregnancy, medication या personal circumstances के अनुसार fasting pattern बदलना चाहिए।
धार्मिक व्रत के लिए health risk लेना उचित नहीं है।
क्या बच्चे प्रदोष व्रत रखें?
छोटे बच्चों को कठोर fasting कराना जरूरी नहीं है।
उन्हें:
- शिव पूजा
- मंत्र
- भक्ति कथा
- मंदिर दर्शन
- दान और सेवा
जैसी सकारात्मक परंपराओं में शामिल किया जा सकता है।
प्रदोष व्रत और शिवरात्रि में क्या अंतर है?
दोनों भगवान शिव से जुड़े धार्मिक अवसर हैं लेकिन दोनों अलग हैं।
प्रदोष व्रत प्रत्येक मास की दोनों त्रयोदशी तिथियों से जुड़ा है।
मासिक शिवरात्रि कृष्ण पक्ष चतुर्दशी से जुड़ी होती है।
इसीलिए प्रदोष और शिवरात्रि को एक ही व्रत न समझें।
Guru Pradosh Vrat 2026 FAQs
गुरु प्रदोष व्रत सितंबर 2026 में कब है?
गुरु प्रदोष व्रत गुरुवार 24 सितंबर 2026 को है।
त्रयोदशी तिथि कब शुरू होगी?
त्रयोदशी 23 सितंबर 2026 को रात 10:50 बजे शुरू होगी।
त्रयोदशी कब समाप्त होगी?
24 सितंबर 2026 को रात 11:18 बजे त्रयोदशी समाप्त होगी।
गुरु प्रदोष पूजा का समय क्या है?
नई दिल्ली में प्रदोष पूजा का समय लगभग 6:16 PM से 8:39 PM है।
क्या दूसरे शहरों में समय अलग होगा?
हां। प्रदोष काल सूर्यास्त पर आधारित होने के कारण शहर के अनुसार समय बदलता है। उदाहरण के लिए Aligarh में यह लगभग 6:12 PM–8:35 PM और Ghaziabad में लगभग 6:15 PM–8:38 PM है।
प्रदोष व्रत किस भगवान के लिए रखा जाता है?
यह मुख्य रूप से भगवान शिव की उपासना से जुड़ा व्रत है।
गुरु प्रदोष क्यों कहते हैं?
क्योंकि प्रदोष गुरुवार को पड़ रहा है।
क्या बिना व्रत के पूजा कर सकते हैं?
हां। उपवास न रख पाने पर भी शिव पूजा, जलाभिषेक और मंत्र जप कर सकते हैं।
कौन-सा मंत्र सबसे सरल है?
ॐ नमः शिवाय
क्या दूध चढ़ाना जरूरी है?
नहीं। स्वच्छ जल से अभिषेक करना भी पर्याप्त सरल पूजा है।
क्या शाम की पूजा जरूरी है?
प्रदोष व्रत का मुख्य धार्मिक समय सूर्यास्त के आसपास का प्रदोष काल माना जाता है, इसलिए शाम की पूजा का विशेष महत्व है।
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जरूरी धार्मिक Disclaimer
इस लेख में दी गई पूजा विधि और धार्मिक जानकारी सामान्य हिंदू परंपराओं, पंचांग calculations और उपलब्ध धार्मिक references पर आधारित है।
भारत में अलग-अलग क्षेत्रों, परिवारों, मंदिरों और संप्रदायों में पूजा-विधि और व्रत के नियम अलग हो सकते हैं।
किसी विशेष पारिवारिक अनुष्ठान, संकल्प या विधिवत पूजा के लिए अपने परिवार की परंपरा या अनुभवी आचार्य/पुरोहित से मार्गदर्शन लेना बेहतर है।
मुहूर्त सूर्यास्त और स्थान पर निर्भर करता है, इसलिए अपने शहर का local Panchang जरूर check करें।
धार्मिक पूजा, मंत्र या व्रत को स्वास्थ्य, आर्थिक समस्या, नौकरी, परीक्षा, बीमारी या किसी अन्य जीवन-समस्या के निश्चित समाधान की guarantee न मानें।
अंत में जाते-जाते
24 सितंबर 2026 का गुरु प्रदोष व्रत भगवान शिव की उपासना का अवसर है, लेकिन इसे केवल “कौन-सा उपाय करें ताकि इच्छा तुरंत पूरी हो” वाली सोच तक सीमित करना इस व्रत के गहरे भाव को छोटा कर देता है।
प्रदोष हमें एक सरल बात याद दिलाता है—
दिन भर की भागदौड़ के बाद थोड़ी देर रुकना, अपने मन को देखना और महादेव के सामने शांत होना भी साधना है।
नई दिल्ली के लिए प्रदोष पूजा का समय लगभग शाम 6:16 बजे से रात 8:39 बजे तक है।
लेकिन दूसरे शहरों में समय थोड़ा अलग होगा।
सुबह सामान्य शिव पूजा करें।
शाम प्रदोष काल में जल अर्पित करें।
बेलपत्र उपलब्ध हो तो चढ़ाएं।
“ॐ नमः शिवाय” का जप करें।
आरती करें।
और सबसे महत्वपूर्ण—
महादेव से केवल अपनी इच्छाओं की सूची न कहें।
थोड़ी प्रार्थना यह भी करें कि हमें सही और गलत पहचानने की बुद्धि मिले, कठिन समय में धैर्य मिले और दूसरों के प्रति करुणा बनी रहे।
क्योंकि शायद गुरु प्रदोष का सबसे सुंदर संदेश यही है—
भक्ति केवल मांगने का नाम नहीं, स्वयं को बेहतर बनाने का संकल्प भी है।
हर हर महादेव।